Bilaspur News: स्थानीय महिलाओं ने कहा कि अगर उनका घर और दुकान दोनों छिन गए, तो परिवार चलाना नामुमकिन हो जाएगा. वहीं नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि यह पूरा मामला विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़ा है.
लिंगियाडीह क्षेत्र में नगर निगम द्वारा मकानों को तोड़कर कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाने की योजना के विरोध में स्थानीय लोग, खासकर महिलाएं पिछले 46 दिनों से धरने पर बैठी हैं. महिलाएं दिन-रात सड़क किनारे बैठकर अपने घर बचाने की गुहार लगा रही हैं. उनका कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगें नहीं मानता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. नगर निगम वसंत विहार चौक से दयालबंद पुल तक सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण की योजना पर काम कर रहा है. इसी के तहत लिंगियाडीह इलाके में करीब 113 मकान और कई दुकानों को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की तैयारी है. इससे पहले 173 घर और दुकानें पहले ही जमींदोज की जा चुकी हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें साल 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी और उनसे पैसे भी जमा कराए गए थे लेकिन आज तक उन्हें लिखित पट्टा नहीं दिया गया. प्रभावित परिवार पक्के मकान और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि बिना पुनर्वास के उन्हें उजाड़ना अन्याय है. धरने पर बैठी रामबाई मानिकपुरी ने लोकल 18 से कहा कि वह वर्षों से बिलासपुर में अकेली रह रही थीं. नगर निगम ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनका घर तोड़ दिया. अब वह किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं. घर टूटने के सदमे से उनके बच्चे मानसिक तनाव में हैं और इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए हैं. पिंकी देवांगन ने कहा कि उनकी दुकान को अतिक्रमण बताकर तोड़ दिया गया, जहां उनका परिवार कई दशकों से रहकर रोजी-रोटी चला रहा था. अब उनके घर पर भी खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने मांग की कि उनका घर न तोड़ा जाए और दुकान को व्यवस्थित तरीके से दोबारा दिया जाए ताकि परिवार का खर्च चल सके.
किराए से आर्थिक स्थिति खराब
जिन परिवारों के घर टूट चुके हैं, वे अब मजबूरी में किराए के मकानों में रह रहे हैं. भारी किराया चुकाने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. महिलाओं का कहना है कि अगर घर और दुकान दोनों छिन गए, तो परिवार चलाना नामुमकिन हो जाएगा. नगर निगम का कहना है कि यह पूरा मामला विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़ा है. निगम अधिकारियों के अनुसार, सभी पात्र परिवारों को नियमानुसार पक्का मकान दिया जाएगा, हालांकि मुआवजे का प्रावधान नहीं है. इसी बात को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच टकराव बना हुआ है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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