Chhattisgarh High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुस्लिम वसीयत पर बड़ा फैसला दिया है. कोरबा की विधवा जैबुननिशा के पक्ष में निचली अदालतों के आदेश को रद्द कर दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का प्रभाव मुस्लिम समाज में संपत्ति बंटवारे पर पड़ेगा.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट.
यह फैसला कोरबा की 64 वर्षीय विधवा जैबुननिशा के पक्ष में आया. उनके पति अब्दुल सत्तार लोधिया की 2004 में मौत के बाद भतीजे मोहम्मद सिकंदर ने 27 अप्रैल 2004 की एक वसीयत पेश की, जिसमें पूरी जायदाद (मकान-जमीन) खुद को “गोद लिया बेटा” बताकर दे दी गई थी. जैबुननिशा ने वसीयत को फर्जी बताते हुए अपना हक मांगा. निचली अदालतों ने 2015-16 में उनका दावा खारिज कर दिया था.
हाईकोर्ट ने पलट दिया फैसला
वहीं, हाईकोर्ट के जस्टिस बिभुदत्त गुरु की सिंगल बेंच ने 2 फरवरी 2026 को निचली अदालतों के दोनों फैसले पलट दिए. कोर्ट ने मोहम्मदन लॉ की धारा 117 और 118 का हवाला देते हुए कहा, वसीयत केवल एक तिहाई तक ही वैध है. इससे ज्यादा के लिए वारिसों की सहमति साबित करना भतीजे का दायित्व था, विधवा का नहीं. चुप्पी, देरी या मुकदमा न लड़ना सहमति नहीं माना जा सकता.
महिला का हक बहाल रखा
जस्टिस गुरु ने लिखा, “कानूनी एक तिहाई से ज्यादा की वसीयत वारिसों की मौत के बाद की रज़ामंदी के बिना प्रभावी नहीं हो सकती.” कोर्ट ने विधवा का हक बहाल कर दिया.
संपत्ति बंटवारे पर पड़ेगा प्रभाव
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मुस्लिम समाज में संपत्ति बंटवारे और फर्जी वसीयतों पर बड़ा असर डालेगा. उनका कहना है कि इससे वारिसों (खासकर विधवाओं) के अधिकार मजबूत होंगे और अदालतों में ऐसे मामले बढ़ने की उम्मीद है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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