देशभर में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों का असर अब आयुर्वेदिक औषधियों पर भी दिखने लगा है. स्वर्ण और रजत युक्त दवाओं की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे गंभीर रोगों में उपयोग होने वाली आयुर्वेदिक दवाएं महंगी होती जा रही हैं. बीकानेर की आयुर्वेदिक रसायनशालाओं में बनने वाली इन औषधियों की कीमत 1300 से 1700 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच चुकी है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है.
सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि के चलते दवाओं की लागत बढ़ी
उन्होंने बताया कि दवाइयों के निर्माण में सिर्फ सोना और चांदी ही नहीं, बल्कि इनके शुद्धिकरण की जटिल प्रक्रिया, कई सहायक द्रव्यों का उपयोग, श्रमिकों की मजदूरी और अन्य निर्माण खर्च भी शामिल होते हैं. अब जब सोने और चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है तो औषधियों की लागत भी बढ़ना स्वाभाविक है. वर्तमान समय में इन दवाइयों की कीमत लगभग 1300 से 1700 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच चुकी है. यदि कीमती धातुओं के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले समय में दवाइयों की कीमतों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है.
सरकार को गंभीरता से विचार कर नीति बनाने की जरूरत
डॉ. शर्मा ने बताया कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए कोई नीति बनानी चाहिए ताकि औषधि निर्माण में प्रयुक्त सोने और चांदी पर राहत या सब्सिडी मिल सके. इससे आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन प्रभावित नहीं होगा और मरीजों को सुलभ दरों पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति एलोपैथी से अलग है और सही तरीके से निर्मित इन दवाइयों के दुष्प्रभाव भी सामान्यतः देखने को नहीं मिलते. ऐसे में आयुर्वेदिक उपचार की मांग लगातार बढ़ रही है. सोने-चांदी के बढ़ते दामों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को आम लोगों तक सुलभ बनाए रखने के लिए सरकार और औषधि निर्माता किस प्रकार समाधान निकालते हैं.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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