आत्मसमर्पण के लिए माओवादी अपने साथ हथियार लेकर पहुंचे थे. इनमें तीन बड़े कैडर के नक्सली भी हैं, जब ये पहुंचे, तो बीजापुर पुलिस ने उनका रेड कॉर्पेट बिछाकर स्वागत किया. सर्वसमाज के पदाधिकारी भी यहां पहुंचे और उनकी तरफ से समर्पण करने वाले नक्सलियों को भारत का सविंधान दिया गया. इसके अलावा गुलाब देकर मुख्यधारा में शामिल कराया.
एके-47 के साथ समर्पण करने पहुंचे थे मरकम समरू
समर्पण करने वाले मरकम समरू ने कहा कि मैं दरभा डिवीजन कमेटी में एसी सचिव पद पर था. उन्होंने कहा कि मैं साल 2007 में शामिल हुआ था. फिर साल 2011 में प्रमोशन हुआ, इसके बाद साल 2017 में दरभा ट्रॉफर हुआ. वह AK-47 हथियार के साथ पहुंचे थे, जो संगठन ने 2021 में दिया था.
संगठन से अलग क्यों हुए?
मरकम समरू से जब पूछा किया गया कि समर्पण क्यों किया, तो उन्होंने कहा कि पुलिस गश्त अभियान लगातार बढ़ रहा है और कोने-कोने में पुलिस पहुंच रही. बड़े-बड़े कैडर भी सरेंडर कर रहे हैं, जैसे रूपेस दादा और सोनू दादा. ऐसा सोच कर मैं भी समाज के मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आया.
उन्होंने कहा कि मैंने पहले सविंधान का नाम नहीं सुना था और अब उन्हें अच्छा लग रहा है. आगे जीने के लिए परिवार के साथ खेती-बाड़ी करुंगा. हिंसा बिल्कुल अच्छी नहीं है. अन्य नक्सलियों के लिए उन्होंने कहा कि सबको समाज की मुख्यधारा में जीना आना चाहिए. मैंने चिट्ठियां लिखी हैं.
46 लाख रुपए का था इनाम
बीजापुर जिले में साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 12 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए समाज की मुख्यधारा में वापसी की है. इन कैडरों पर कुल 46 लाख रुपए का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान AK-47, SLR राइफल, कारतूस सहित भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षाबलों को सौंपी गई. पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 888 माओवादी आत्मसमर्पण, 1163 गिरफ्तार और 231 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए हैं.
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