सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक प्रसूता के परिजनों ने बेटे की जगह बेटी सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। नवजात के बदलने की बात सामने आते ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। हालात बिगड़ते देख ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने अस्पताल से बाहर निकलकर नगर थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की छानबीन में जुट गई।
पीड़िता के भाई संजय कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह उन्होंने अपनी बहन गुंजन को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। करीब 12 बजे डॉक्टर उसे प्रसव के लिए ले गए। कुछ देर बाद अस्पताल के एक कर्मी ने परिजनों को बताया कि बेटा हुआ है और नसबंदी करानी है। पहले से प्रसूता को चार बेटियां थीं, इसलिए बेटे के जन्म की जानकारी मिलने पर परिजनों ने नसबंदी करवा दी। लगभग एक घंटे बाद जब अस्पताल कर्मियों ने बेटे की जगह बेटी सौंपनी चाही, तो परिजनों ने बच्ची लेने से इनकार कर दिया और डॉक्टर व नर्स पर बच्चे की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
आक्रोशित परिजनों के हंगामे को देख ओटी वार्ड में तैनात सभी कर्मी वार्ड छोड़कर बाहर निकल गए। इधर, सूचना मिलते ही नगर थाना की पुलिस दल-बल के साथ अस्पताल पहुंची और परिजनों को समझाने-बुझाने में जुट गई, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे और बेटे को सौंपने की मांग पर अड़े रहे। करीब दो घंटे तक चले हंगामे और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी सदर अस्पताल में नवजात की अदला-बदली का मामला सामने आ चुका है। बीते 30 अगस्त को नवजात शिशु चिकित्सा इकाई में गड़बड़ी के कारण बच्चे की अदला-बदली को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। बिदुपुर थाना क्षेत्र के दुगोली गांव निवासी दीपक ठाकुर की पत्नी प्रियंका कुमारी ने देर रात एक बच्चे को जन्म दिया था, जो लड़का था और इलाज के लिए नवजात शिशु चिकित्सा इकाई में रखा गया था। वहीं, एक अन्य महिला जिसका नाम भी प्रियंका कुमारी था, उसकी बच्ची का भी वहीं इलाज चल रहा था। दोनों माताओं का नाम एक होने के कारण अस्पताल कर्मियों से बच्चे की अदला-बदली हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने हंगामा किया था।
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क्या कहते हैं अधिकारी
इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने कहा कि संबंधित प्रसूता ने बेटी को ही जन्म दिया था। किसने परिजनों को बेटा होने की जानकारी दी, इसकी जांच की जाएगी। इसके लिए एक टीम का गठन कर दिया गया है और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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