बिहार के मोकामा से पूर्व विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के 11 साल पुराने मामले में साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया है। विशेष न्यायिक दंडाधिकारी पंकज कुमार मालवीय की अदालत ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2014 का है, जब पटना के श्रीकृष्णापुरी थाने में राघवेंद्र प्रताप सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अनंत सिंह के करीबी बंटू सिंह और तीन अन्य लोग उनके घर में जबरन घुस आए थे। उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि विधायक अनंत सिंह को 10 करोड़ रुपये पहुंचा दो।
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अदालत के फैसले की मुख्य बातें
पुलिस इस मामले में ठोस सबूत पेश करने में विफल रही। अभियोजन की ओर से केवल अनुसंधानकर्ता (IO) ने गवाही दी, जबकि अन्य कोई गवाह कोर्ट नहीं पहुंचा। अदालत ने अनंत सिंह के साथ-साथ उनके करीबी बंटू सिंह को भी आरोपों से मुक्त कर दिया है। फैसले के वक्त अनंत सिंह को बेऊर जेल से लाकर विशेष अदालत में पेश किया गया था।
बचाव पक्ष का तर्क
अनंत सिंह के वकील सुनील कुमार ने कोर्ट को बताया कि यह मामला पूरी तरह निराधार था। अनुसंधान के बाद पुलिस ने चार्जशीट तो दाखिल की, लेकिन गवाहों के अदालत में न आने और ठोस साक्ष्य न होने के कारण यह आरोप टिक नहीं सके। 11 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया।
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