पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई छात्रा की मौत आत्महत्या है या हत्या, यह सबके सामने आना बाकी है। लेकिन उसके साथ जो कुछ हुआ वह पोस्टमोर्टम में स्पष्ट हो चूका है। थानाध्यक्ष, एएसपी, एसपी और एसएसपी कार्तिकेय कुमार और प्रभात अस्पताल के डॉक्टर सवालों के कटघरे में है। परिजनों की मांग है कि मामले को अनुसंधान को दिशाहीन करने और भ्रम की स्थिति में लाने के आरोप में इन अधिकारियों को भी अभियुक्त की श्रेणी में लाना चाहिए। हालांकि अब पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द मामले का खुलासा हो जाएगा जो पूरे मामले को ही उलट देगा। पुलिस का कहना है कि मामला अब उस निर्णायक तफ्तीश पर पहुंचता दिख रहा है, जहां एक प्रमाण पूरे केस की दिशा तय करेगा।
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इस वजह से पटना पुलिस की हुई किरकिरी
अब तक की कहानी में थानाध्यक्ष ने झूठा रिपोर्ट दिया। एएसपी और एसपी ने बताया कि छात्रा ने आत्महत्या की है। वहीं एसएसपी ने अपनी बातों में इस बात का मजबूती से उल्लेख किया था कि पीड़िता को किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना नहीं दी गई है। उन्होंने बताया था कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म जैसी कोई घटना नहीं हुई है।उन्होंने दुष्कर्म होने से साफ़ तौर पर इंकार किया था। उन्होंने यह जरुर कहा कि छात्रा के कमरे से दर्जनों नींद की गोलियां बरामद की गई, लेकिन एक सामान्य आदमी के लिए नींद की गोलियां उपलब्ध करना आसान नहीं होता।
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इन सवालों के साथ सुलग रहे परिजन
पोस्टमोर्टम रिपोर्ट आने के बाद जब पटना पुलिस की किरकिरी होने लगी तब आननफानन में हॉस्टल मालिक मनीष राज उर्फ़ मनीष कुमार रंजन को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया। साथ ही आईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। विदित हो कि गिरफ्तार कर जेल भेजे गये मनीष राज उर्फ़ मनीष कुमार रंजन अप्राथमिक अभियुक्त हैं। परिजनों का आक्रोश इस बात पर है कि क्या हॉस्टल संचालक नीलम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल और पुत्र अंशु अग्रवाल से पुलिस ने पूछताछ की? अगर पूछताछ की तो क्या जानकारी मिली? और अगर पूछताछ नहीं की तो फिर इनसे पूछताछ में आनाकानी क्यों? आक्रोशित लोगों का सवाल यह भी है कि घटना के अनुसंधान को गलत बयानबाजी से दिशाहीन करने वाली पटना पुलिस आखिर किसके दवाब में है?
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जांच अब इस दिशा में बढ़ा रहा कदम
हालांकि घटना के संबंध में पुलिसिया जानकारी बताती है कि जांच अब तीन थ्योरी पर आगे बढ़ रही है। पहली थ्योरी यह है कि छात्रा जिस दिन जहानाबाद से पटना पहुंची, उस वक्त उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी? क्या यात्रा के पहले या यात्रा के दौरान कोई असामान्य घटना हुई? दूसरी थ्योरी यह है कि पटना पहुंचने के बाद छात्रा पटना के किसी अन्य लोगों से किसी अन्य जगह पर मुलाक़ात की ? क्या उन स्थानों से लौटने के बाद वह सामान्य अवस्था में हॉस्टल पहुंची थी? और तीसरी थ्योरी यह कि अगर छात्रा हॉस्टल लौटते समय वह पूरी तरह सामान्य थी, तो क्या अपराध या संदिग्ध घटना हॉस्टल परिसर के भीतर, किसी खास कमरे में हुई?
जांच अंतिम पायदान पर, बस एक प्रमाण का मिलना अब बाकी
इन थ्योरी पर जांच करने के लिए पुलिस तकनीकी, फॉरेंसिक, सीडीआर, मोबाइल टावर लोकेशन, डिलीटेड डेटा और मूवमेंट पैटर्न की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। इसके पीछे का लॉजिक यह है कि पुलिस के अनुसार तीन संभावित घटनास्थल हो सकते हैं। पहला पटना आने से पहले का स्थल, दूसरा पटना आने के बाद एक अन्य स्थान और तीसरा घटनास्थल गर्ल्स हॉस्टल। पुलिस के अनुसार जांच अंतिम पायदान पर है, बस एक प्रमाण का मिलना अब बाकी है।
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