‘पैसा जितना चाहिए मिल जाएगा। बैंक की तरह फॉर्मेलिटी नहीं करनी है। बस घर दिखाकर परिवार से मिलवा दीजिए। एक सादे स्टांप पेपर पर पत्नी का सिग्नेचर करवा दीजिए। बैंक का ATM कॉर्ड और 4 ब्लैंक चेक दे दीजिए।
घर पर ही कैश में पैसा मिल जाएगा। एक बात याद रखिएगा, अगर आप पैसा नहीं दे पाए तो आपकी बीवी को उठा ले जाएंगे। हम लोग सूद का पैसा नहीं देने वालों के घर लाइव तांडव कर देते हैं।’
यह दावा गुंडा बैंक चलाने वाले एजेंट्स कर रहे हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में एक्सपोज हुए इन एजेंट्स से डरकर कई परिवार सुसाइड की दहलीज पर हैं।
सम्राट चौधरी ने गुंडा बैंक पर सख्ती दिखाई तो एजेंट्स और एक्टिव हो गए। गृहमंत्री के दावों के बाद गुंडा बैंक चलाने वालों की गुंडई जारी है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए ब्याज के पैसों के लिए मौत के घाट पहुंचाने वाले गुंडा बैंक की कहानी..।
सम्राट के चैलेंज पर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन
गृहमंत्री बनने के बाद गुंडा बैंक के खिलाफ सम्राट चौधरी का एक्शन मोड दिख रहा है। बिहार में गुंडा बैंक को बंद कराने और ऐसे बैंक चलाने वाले गुंडों को सलाखों के पीछे भेजने का दावा करने वाले सम्राट के चैलेंज का बिहार में कितना असर है, इसकी हकीकत जानने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने 10 दिनों तक पड़ताल की। पहले हमने गुंडा बैंकों से कर्ज लेकर सुसाइड की दहलीज तक पहुंच चुके लोगों से मुलाकात की। उनसे बातचीत करने के बाद गुंडा बैंक चलाने वालों से भी कर्ज के लिए डील की।
इन्वेस्टिगेशन के दौरान पता चला कि पटना और आसपास के जिलों में टीचर और रेलकर्मी सबसे अधिक कर्ज में डूबे हैं। कर्ज लेने वालों से ही हमें बादशाह खान का नंबर मिला। बादशाह खान कर्मचारियों को कर्ज देता है और हर महीने की 2 तारीख को ब्याज वसूलता है।
बादशाह खान पैसा वसूलने के मामले में सबसे कठोर है। वह सामने नहीं आया, लेकिन फोन पर पूरी डील की। बादशाह बोला कर्ज जितना चाहिए मिल जाएगा, लेकिन रेफरेंस के लिए किसी को लाना होगा।
रिपोर्टर – मैं सरकारी टीचर हूं, इमरजेंसी में कुछ पैसों की जरूरत थी।
बादशाह – आपको नंबर किसने दिया है।
रिपोर्टर – आपसे मुलाकात हुई थी, DRM ऑफिस के पीछे।
बादशाह – मेरे बारे में आपको किसने बताया।
रिपोर्टर – रेलवे वाले रवि जी से आपका नंबर मिला।
बादशाह – कौन रवि, मैं नहीं पहचान पा रहा हूं।
रिपोर्टर – रवि ने आपसे कई लोगों को पैसा दिलवाया है।
बादशाह – आपका काम हो जाएगा, रवि को बोलिए हमसे बात कर लें।
रिपोर्टर – भइया, पता नहीं क्यों अभी उसका फोन नहीं लग रहा है।
बादशाह – हम बिना जाने पहचाने पैसा नहीं देंगे, किसी जानने वाले से कहलवा दीजिए।
रिपोर्टर – ठीक है, हम रवि से बोल रहे हैं, आपसे बात कर लें।
बादशाह ने 30 मिनट में खंगाल लिया नेटवर्क
रेल कर्मियों और सरकारी टीचरों को मुंहमांगे ब्याज पर कर्ज देने वाला बादशाह काफी शातिर निकला। रिपोर्टर से बात करने के बाद वह आधे घंटे के अंदर ही अपना पूरा नेटवर्क खंगाल लिया। वसूली करने वाले गुर्गों और पैसा बांटने वाले अपने एजेंटों से पता लगा लिया।
इसका खुलासा रिपोर्टर के दोबारा कॉल करने पर हुआ। रिपोर्टर ने जब बादशाह को दोबारा कॉल किया तो उसने कहा रवि नाम का कोई व्यक्ति उसके नेटवर्क में नहीं है। बादशाह बोला, ‘हमने 30 मिनट में अपने सारे नेटवर्क को खंगाल लिया है। बादशाह को यह शक हो गया कि हम कर्ज के बहाने उसकी पड़ताल कर रहे हैं। इसलिए उसने कॉल अटेंड करना भी बंद कर दिया।’

बादशाह खान से बातचीत और पड़ताल के दौरान ही रेल कर्मचारियों को कर्ज देने वाले सुरेंद्र के बारे में पता चला। सुरेंद्र ने अधिक संख्या में रेलवे कर्मचारियों को पैसे दिए हैं। दानापुर के आसपास काम करने वाले रेल कर्मचारियों के बीच सबसे अधिक सुरेंद्र ने पैसे बांटे हैं।
वह दानापुर में रहता है, इसलिए अपने ही एरिया में दबंगई से पैसे वसूलता है। रिपोर्टर ने सुरेंद्र को कॉल किया तो उसने मिलने से मना कर दिया, लेकिन फोन पर कर्ज को लेकर पूरी डील की।
रिपोर्ट- मैं BPSC टीचर हूं, अर्जेंट में पैसा चाहिए था।
सुरेंद्र – आपको मेरा नंबर कहां से कैसे मिला?
रिपोर्टर – रेलवे वाले रवि जी ने दिया है।
सुरेंद्र – आप क्या करते है?
रिपोर्टर – बताया तो सरकारी टीचर हूं, गर्दनीबाग मिडिल स्कूल में पोस्टिंग है।
सुरेंद्र – कितना पैसा चाहिए आपको?
रिपोर्टर – 1 लाख रुपए अभी तत्काल में चाहिए था।
सुरेंद्र – अब हम पैसा नहीं लगाते हैं।
रिपोर्टर – बहुत अर्जेंट है, व्यवस्था कर दीजिए, जो होगा हिसाब हो जाएगा।
सुरेंद्र – डायरेक्ट हम लोग किसी को कुछ नहीं देते हैं, आपको सिस्टम नहीं पता।
सम्राट की सख्ती से बदला गुंडा बैंक का सिस्टम
बादशाह खान और सुरेंद्र से बातचीत में यह बात साफ हो गई कि गुंडा बैंक का पूरा सिस्टम अलग है। गुंडा बैंक चलाने वाले पैसा भी बड़ी चालाकी से दे रहे हैं। सरकार की सख्ती के बाद गुंडा बैंक चलाने वालों ने अपना पूरा सिस्टम बदल दिया है। अब वह बिना मीडिएटर के कर्ज नहीं दे रहे हैं। सम्राट चौधरी की सख्ती के बाद काम चल रहा है, लेकिन ट्रेंड थोड़ा बदल गया है।

सुरेंद्र से बातचीत के दौरान गुंडा बैंक का पूरा सिस्टम पता चला। गुंडा बैंक का सिस्टम खंगालने में आकाश का नाम सामने आया। आकाश ने भी पटना में बड़े पैमाने पर पैसे बांटे हैं। वह पटना के कई इलाकों में गुंडा बैंक चलाता है। आकाश भी मिलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन फोन पर डील की। बोला सरकार की सख्ती है, फोन पर ही जरूरत की बात कीजिए।
रिपोर्टर – भइया, हमको अर्जेंट में जरूरत है, कुछ पैसा चाहिए।
आकाश – मेरा नंबर आपको किसने दिया, मेरे बारे में कहां से पता चला।
रिपोर्टर – सोनू जी ने आपका नंबर दिया है, बोले काम हो जाएगा।
आकाश – कौन सोनू जी, कहां के रहने वाले हैं।
रिपोर्टर – रेलवे टेक्नीशियन हैं, जिनको आपने पहले पैसा दिया है।
आकाश – अच्छा, उसको बोलिएगा हमसे बात कर लीजिए, काम हो जाएगा।
रिपोर्टर – बताइए, कैसे होगा?
आकाश – आप क्या करते है।
रिपोर्टर – बीपीएससी टीचर हैं।
आकाश – अभी कहां पोस्टेड है।
रिपोर्टर – गर्दनीबाग मिडिल स्कूल में पोस्टिंग है।
आकाश – आप कहां रहते हैं।
रिपोर्टर – गर्दनीबाग रोड नंबर 15 में रहते हैं।
आकाश – आपका काम तो हो जाएगा, लेकिन सिस्टम से होगा।
रिपोर्टर – पैसे लेने के लिए क्या-क्या करना होगा?
आकाश – आप किसी जानने वाले को लाइए, फिर काम हो जाएगा।
आकाश बोला – घर पर आएंगे, पत्नी की डिटेल ले लेंगे
आकाश से कर्ज को लेकर रिपोर्टर की कई बार फोन पर बात हुई। विश्वास तो बढ़ा, इसके बाद भी वह मिलने को तैयार नहीं हुआ। वह परिवार के बारे में पूरी छानबीन करने के बाद बताया कि घर पर आएंगे, वहीं मुलाकात होगी। आकाश ने पत्नी को लेकर अधिक दबाव बनाया, बोला- मिलकर पूरा प्लान बताएंगे।
रिपोर्टर – पैसा बहुत जरूरी है, व्यवस्था करा दीजिए।
आकाश – आपके घर पर आकर बात करेंगे, घर भी देख लेंगे परिवार से भी मिल लेंगे।
रिपोर्टर – घर परिवार और बीवी का क्या काम? पैसा आप दीजिए, मैं हर शर्त पर वापस करुंगा।
आकाश – आप भाग गए या पैसा नहीं दे पाए तो बीवी तो रहेगी ना वसूली के लिए।
रिपोर्टर – घर पर आना जरुरी है क्या?
आकाश – हां, बिना घर पर आए हम पैसा नहीं देते हैं।
रिपोर्टर – पैसे के लिए पेपर क्या लेंगे?
आकाश – सादा स्टांप पेपर, बैंक का पासबुक एटीएम, 4 साइन किया हुआ ब्लैंक चेक।
रिपोर्टर – एटीएम भी आप ले लेंगे क्या?
आकाश – हां, आपके आईकार्ड का दो फोटो कॉपी भी लेंगे।
रिपोर्टर – इसके अलावा तो कोई पेपर नहीं चाहिए ना?
आकाश – आपकी पत्नी का बैंक पासबुक, उसका एटीएम उसका 4 चेक चाहिए।
रिपोर्टर – पत्नी का इतना कागजात और एटीएम क्यों लेंगे।
आकाश – आपकी पत्नी के सिग्नेचर का ब्लैंक स्टांप भी चाहिए, रिकवरी के लिए।
गुंडा बैंक का 84% सालाना ब्याज
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सबसे बड़ी कड़ी में आकाश का नाम सामने आया। आकाश ने रिपोर्टर को पूरा सिस्टम बता दिया। आकाश ने कर्ज लेने वाले की पत्नी के साथ क्या होगा और किस तरह से पैसा वसूला जाएगा, सब बता दिया। आकाश के मुताबिक, पूरा धंधा दबंगई का है।
हालांकि सरकार की सख्ती से थोड़ा धंधा डाउन हुआ है, लेकिन अभी भी मीडिएटर के माध्यम से पूरा खेल चल रहा है। आकाश ने ब्याज की दर बताकर चौंका दिया। वह जो गुंडा बैंक चला रहा है, उसमें 84% सालाना ब्याज है।
आकाश के मुताबिक, बिहार में ब्याज पर पैसा देने वाले सभी एजेंट का लगभग यही रेट है। कुछ तो जरूरत का फायदा उठाकर इससे भी अधिक ब्याज पर पैसा देते हैं। देखिए आकाश ने कैसे की ब्याज पर डील।
रिपोर्टर – ब्याज कितना लगेगा?
आकाश – कर्ज में कितना पैसा लेना है?
रिपोर्टर – 2 लाख
आकाश – 7 प्रतिशत महीना ब्याज लिया जाएगा।
रिपोर्टर – तब तो 84% सालाना ब्याज हो गया।
आकाश – वो तो लगेगा ही, आप पैसा लेंगे तो होगा ही।
रिपोर्टर – आप अपना एड्रेस दे दीजिए, हम मिलकर बात कर लें।
आकाश – जिससे आपको मेरा नंबर मिला है, उसी से मेरा एड्रेस ले लीजिएगा।
रिपोर्टर – अभी उसका फोन नहीं लग रहा, आप एड्रेस दे दीजिए, हम आ जाते हैं
आकाश – बिना जान पहचान के हमलोग पैसा नहीं देते हैं।
रिपोर्टर – फिर कैसे पैसा मिलेगा, जो आपके बारे में बताया, उसका नंबर नहीं लग रहा।
आकाश – आप अपना फुल एड्रेस दीजिए, हम आपके स्कूल में ही मिल लेंगे।
रिपोर्टर – नहीं नहीं, स्कूल में सब हल्ला हो जाएगा।
आकाश – देखिए बिना जान पहचान या घर देखे बिना पैसा नहीं देते।
रिपोर्टर – सब कागज आपको दे देंगे।
आकाश – नौकरी का पेपर देखेंगे, पत्नी परिवार से मिलकर फाइनल करेंगे।
रिपोर्टर – बैंक से भी सख्त नियम है आपका?
आकाश – मैं जानना चाहता हूं, कौन सोनू है, जिसने मेरे बारे में बताया।
रिपोर्टर – नंबर नहीं मिल रहा है नहीं तो बात करा देते?
आकाश – मेरे जान पहचान में कोई सोनू नाम का रेलवे में नहीं है, जिसने पैसा लिया हो।
रिपोर्टर – ठीक है, हम सोनू को लेकर आते हैं।
आकाश – ठीक है, इसके बाद घर चलकर आपकी पत्नी से मिल लेंगे।
लाइसेंस की धमकी देकर करते हैं वसूली
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि गुंडा बैंक चलाने वालों के पास कोई लाइसेंस नहीं है। 84% सालाना ब्याज वसूल रहे गुंडा बैंक के एजेंट फर्जी धौंस दिखाते हैं। गुंडा बैंक चलाने वाले वसूली के दौरान यही बोलते हैं कि वह लाइसेंसी हैं, पुलिस केस कराकर भी पैसा वसूल लेते हैं। वसूली के लिए यह गुंडे भी पाल रखे हैं जो कर्जदारों पर ऐसा दबाव बना देते हैं, वह घर छोड़कर भाग जाते हैं।
गुंडा बैंक चलाने वाले माफिया कर्जदार को कर्ज देने से पहले उसकी पूरी जानकारी ले लेते है। बैंक से लेकर पत्नी और बच्चों की भी पूरी डिटेल रखते हैं। पैसा नहीं मिलने पर वह हर स्तर से दबाव बनाने को तैयार हो जाते हैं। पत्नी को इसलिए देखते हैं कि वह अगर जवान है तो वसूली के लिए उसे उठा लेते हैं।
ऐसा दबाव बनाते हैं कि पत्नी के बहाने ही कर्ज दिया पैसा मनचाहे ब्याज के साथ वापस मिल जाएगा। इसके लिए वह पति और पत्नी दोनों का स्टैंप लगे सादे पेपर पर साइन करा लेते हैं। सादा चेक और एटीएम के साथ अन्य जरुरी डॉक्यूमेंट भी रखते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ये लोग मजबूरी का फायदा उठाते हुए ये लोग सालाना 84 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज वसूलते हैं।
कर्ज में डूबे पीड़ित बोले – सूदखोर से मर्डर की धमकी
भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम ने ऐसे पीड़ितों को भी ढूंढा, जिनको कर्ज नहीं देने पर जान से मारने की धमकी मिल रही है। कई ऐसे भी पीड़ित सामने आए, जो कैमरे पर आने से डर रहे हैं। वह कहते हैं, कर्ज देने वाले गुंडे का नाम ले लिया तो जान ले लेगा। कई ऐसे भी पीड़ित सामने आए जो कर्ज से डूबकर अब परिवार के साथ सुसाइड करने की सोच रहे हैं।
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में आगे पढ़िए और देखिए कर्जदार पीड़िता की पीड़ा..।

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में गुंडा बैंक से पीड़ित कई कर्जदार सामने आए, जो मूलधन से अधिक ब्याज देने के बाद भी कर्जदार बने हुए हैं, लेकिन इसमें अधिकतर कैमरे पर आने से डर रहे हैं। काफी हिम्मत देने के बाद गोपालगंज के रहने वाले रेलकर्मी ब्रजेश मुंह खोलने को तैयार हुए।
बहन की शादी के लिए पैसा लेकर गुंडा बैंक के जाल में फंसे
गोपालगंज के रहने वाले ब्रजेश कुमार वर्मा की जिंदगी आज कर्ज के बोझ तले दब चुकी है। ब्रजेश का 2009 में रेलवे में इलेक्ट्रीशियन के पद पर चयन हुआ। एक स्थायी नौकरी, सम्मान और सुरक्षित भविष्य का सपना लेकर पटना पहुंचे, लेकिन गुंडा बैंक से आज जिंदगी भारी हो गई है।
ब्रजेश बताते हैं, ‘2015 में बहन की शादी और पिता की गंभीर बीमारी के समय मजबूरी में उन्होंने जितेंद्र से 2 लाख रुपया 4% ब्याज पर लिया था। शुरुआत में किसी तरह ब्याज देते रहे, लेकिन घर का खर्च, माता-पिता की जिम्मेदारी और सीमित सैलरी के कारण हालात बिगड़ते चले गए।’
एक कर्ज चुकाने के लिए कई गुंडा बैंक के कर्जदार
ब्रजेश कर्ज के जाल में इस कदर फंस गए कि एक गुंडा बैंक का कर्ज चुकाने के लिए वह लगातार कई गुंडा बैंक के कर्जदार हो गए। पहले जितेंद्र का पैसा चुकाने के लिए ब्रजेश ने आदित्य से 3 लाख रुपए लिए। इसी बीच उनका बच्चा बीमार पड़ा, इलाज के लिए फिर 50 हजार रुपए और लेने पड़े।
एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा, दूसरे के लिए तीसरा… और तीसरे के लिए चौथा कर्ज लेकर ब्रजेश पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। ब्रजेश का कहना है कि पैसा देने वालों का ब्याज ही इतना अधिक होता है कि वह चुकाने में ही जिंदगी की सारी कमाई चली जाएगी।
ब्रजेश बताते हैं, ‘आज हालत यह है कि कर्ज 15 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। कहीं 3%, कहीं 4%, तो कहीं 8% ब्याज दर से ब्रजेश ने पैसे लिया है। आदित्य से 4 लाख रुपया 3% पर, आकाश से 1.5 लाख रुपया, रामायण साह से 1.5 लाख (3% पर), जो अब 5% ब्याज की मांग कर रहा है। ब्रजेश ने जमाल रोड निवासी बादशाह खान से 50 हजार रूपया 8% पर, लखनी दीघा के अरुण कुमार से 50 हजार रुपया 8% महीना ब्याज पर पैसा लिया है।
मूलधन से 10 गुना गुंडा बैंक का ब्याज
ब्रजेश का कहना है कि वह अब तक जितना कर्ज लिया है, उसका 10 गुना ब्याज हो गया है। अब तक वह 15 लाख रुपए तक पहुंच गया है। ब्रजेश का कहना है कि वह जितना कर्ज लिए उसका 10 गुना चुका चुके हैं फिर भी मूलधन से 10 गुना अधिक के कर्जदार हैं। ब्रजेश ने बताया वह समझ नहीं पा रहा है कि कब तक उसका कर्ज का ब्याज पूरा होगा। उसके परिवार वालों को टार्चर किया जा रहा है।
गुंडा बैंक के कारण अब सुसाइड करने का मन होता है
ब्रजेश कर्ज से टूट चुके हैं। वह कहते हैं, “अब कोई रास्ता नहीं दिख रहा। कई बार आत्महत्या करने का मन करता है।” परेशान हो गया हूं। साहूकार पैसे देते समय चेकबुक और स्टांप पेपर पर साइन करवा लेते हैं। साहूकार घर आकर गाली-गलौज करते हैं, अपमान करते हैं।
बाइक बेच दी गई, पत्नी के गहने तक ब्याज चुकाने में चले गए। पिछले तीन महीने से बच्चों की पढ़ाई बंद है। पत्नी रीना बताती हैं, जब ब्रजेश घर पर नहीं होते, तब साहूकार घर आकर गंदी-गंदी बातें बोलते हैं, डराते हैं। इन सबके बीच ब्रजेश पूरी तरह टूट चुके हैं। बृजेश के 10 साल का बेटा और 8 साल व 3 साल की दो बेटियां हैं।

इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमारी मुलाकात 70 साल की कौशल्या देवी से हुई। कौशल्या के पति बैजू पासवान रेलवे में हेल्पर खलासी के पद पर काम करते थे। साल 2011 में उनकी अचानक मौत हो गई। पति की मौत से कुछ समय पहले बेटी की शादी में खर्च के लिए उन्होंने करीब डेढ़ लाख रुपए कर्ज ले लिए थे। कौशल्या देवी कहती हैं कि वही कर्ज धीरे-धीरे बढ़ता गया।
कौशल्या बताती हैं, ‘डेढ़ लाख का कर्ज लेकर 4 लाख से अधिक का ब्याज दे चुकी हैं। अब ब्याज की रकम 16 लाख रुपए पहुंच गई है। कौशल्या देवी को हर माह 14 हजार रुपए पेंशन मिलती है, जिसमें से 10 हजार रुपए सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में चले जाते हैं। दुख की बात यह है कि कर्ज देने वाले लोग ब्याज पर भी ब्याज जोड़ते जा रहे हैं। इसलिए ही डेढ़ लाख का कर्ज 4 लाख देने के बाद 16 लाख से अधिक पहुंच चुका है।’

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम कौशल्या देवी के बेटे अजय से भी मुलाकात की, जिन्हें पिता की मौत के बाद रेलवे ने मृतक आश्रित में नौकरी दी है। अजय कौशल्या देवी के बड़े बेटे हैं।
अजय बताते हैं, उनके पिता की मौत 2011 में हुई थी। अभी पिता का शव घर में ही था कि कर्ज देने वाले गुंडा बैंक के लोग दरवाजे पर आ धमके। उस वक्त घर में पैसा नहीं था, इसलिए उनसे मोहलत मांगी गई।
तब कहा गया कि जब सरकारी नौकरी मिल जाएगी, तब कर्ज चुका दिया जाएगा। अजय बताते हैं कि नौकरी मिलने में देर हो गई। आखिरकार साल 2013 में नौकरी लगी, लेकिन तब तक कर्जदारों का दबाव और बढ़ चुका था।
ब्याज चुकाने के लिए मजबूरी में 6 लाख रुपए और कर्ज लेना पड़ा। आज हालात यह है कि परिवार पर कुल 26 लाख रुपए का कर्ज हो चुका है। अजय कहते हैं, ‘कभी-कभी लगता है कि सब कुछ छोड़कर कहीं भाग जाऊं, लेकिन नौकरी है… भाग भी नहीं सकता।’
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