जिले में एसआईआर सर्वे के बाद चल रहे मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के दौरान दावे-आपत्ति प्रक्रिया में बड़ा मामला सामने आया है। हजारों मतदाताओं के नाम काटने को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिनमें बड़ी संख्या में शिकायतें झूठी और भ्रामक पाई गई हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि एक विशेष मुस्लिम वर्ग को निशाना बनाकर योजनाबद्ध तरीके से नाम कटवाने के आवेदन दिए गए। ऐसे कई मामलों में उन लोगों के नाम हटाने की शिकायत की गई, जिन्होंने शासन में 40 वर्षों तक सेवा दी है और जिनका जन्म पन्ना जिले में ही हुआ है।
जब इस पूरे मामले की तह तक जाकर पड़ताल की गई तो सामने आया कि जिन लोगों के नाम से शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, उन्होंने खुद ये शिकायतें देने से इंकार किया है।
अजयगढ़ निवासी एक व्यक्ति, जिनके नाम से आवेदन किया गया था, ने कलेक्टर को लिखित शपथ पत्र देकर कहा है कि उन्होंने किसी भी मतदाता का नाम कटवाने की कोई शिकायत नहीं की और उनके नाम से दी गई सभी शिकायतें फर्जी हैं।
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प्रशासन को जब इन शिकायतों पर संदेह हुआ तो मामलों की गहन जांच कराई गई। जांच में कई आवेदन तथ्यहीन और निराधार पाए गए। प्रशासन के अनुसार जिले में करीब 9 हजार लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में बड़ी संख्या में आवेदन गलत पाए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि हर आवेदन की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जहां झूठी शिकायतें सामने आई हैं, वहां नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना ठोस कारण के सूची से नहीं हटाया जाएगा।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। यह प्रकरण मतदाता अधिकारों और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है। फर्जी शिकायतकर्ताओं के नाम से आवेदन किए जाने के कई मामले उजागर हो चुके हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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