इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद शहर में गंदे पानी और बदहाल सफाई व्यवस्था की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। हालात इतने खराब हैं कि अब यह समस्या सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में इंदौर आए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
दैनिक भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची, तो हालात और भी भयावह नजर आए। चारों तरफ गंदगी, खुले पड़े सीवर चेंबर, उनमें गिरकर हादसे का शिकार होते बच्चे और उसी गंदगी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर मासूम। यह सिर्फ बदहाली की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी की जीती-जागती तस्वीर है। पढ़िए रिपोर्ट…
भूरी टेकरी पर बनी बिल्डिंगों के बीच गंदगी।
नल हैं, पर पानी नहीं; मशीन है, पर चलती नहीं भूरी टेकरी की बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए ‘हर घर नल से जल’ एक क्रूर मजाक जैसा है। घरों में नल के कनेक्शन तो सालों पहले लगा दिए गए थे, लेकिन उनमें आज तक पानी की एक बूंद नहीं आई। इन मल्टी-स्टोरी बिल्डिंगों में ऊपर तक पानी पहुंचाने के लिए एक लिफ्टिंग मशीन भी लगाई गई थी।
स्थानीय निवासी नंदा बाई बोरकर बताती हैं, “मशीन सिर्फ एक बार दिखावे के लिए चली थी, तब से वह धूल खा रही है। कभी चली ही नहीं।” अब इन हजारों परिवारों की प्यास बुझाने का एकमात्र जरिया नगर निगम के टैंकर हैं। नंदा बाई रुंधे गले से कहती हैं, “टैंकर का पीला-पीला, गंदा पानी आता है। हमें पता है कि वो साफ नहीं है, टैंकर कभी धुलता ही नहीं, उसमें काई जमी रहती है।

खुले चेंबर हर कदम पर खतरा इस इलाके में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। जगह-जगह कचरे के अंबार लगे हैं। सीवर के चेंबर से ढक्कन गायब हैं, जो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय निवासी राहुल बताते हैं, “शिकायत करने पर कोई नहीं आता। अगर आते भी हैं तो सिर्फ मुख्य सड़क पर झाड़ू लगाकर चले जाते हैं। पीछे की गलियों में तो महीनों से कोई सफाईकर्मी नहीं आया।”
इस लापरवाही का सबसे बड़ा दंश यहां के बच्चे झेल रहे हैं। हाल ही में अपने भाई के घर आई सोनी ने एक दर्दनाक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया, “मेरा ढाई साल का भतीजा आर्यन खेलते-खेलते घर के पास ही खुले पड़े सीवर चैंबर में सिर के बल गिर गया। उसका पूरा मुंह गंदे पानी से भर गया था। हम उसे तुरंत अस्पताल लेकर भागे, इलाज में दो हजार रुपए लग गए। वो तो किस्मत अच्छी थी कि किसी ने देख लिया, वर्ना कुछ भी हो सकता था।

इस तरह से सीवर चेंबर खुले पड़े हैं। देखने वाला कोई नहीं।
शिकायत वापस लेने के लिए कर्मचारी धमकाते हैं यह कोई अकेली घटना नहीं है। लता बाई बताती हैं, “चैंबर के ढक्कन खुले पड़े हैं। आए दिन कोई न कोई बच्चा गिरता है। हम कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। उल्टे कर्मचारी आकर कहते हैं कि शिकायत वापस ले लो, तभी हमारी सैलरी आएगी।”
सबसे शर्मनाक और चिंताजनक तस्वीर बच्चों की उस पाठशाला की है, जो गंदगी के एक बड़े ढेर के ठीक बगल में लगती है। जहाँ देश भर में ‘स्वच्छ विद्यालय’ अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं इंदौर के ये बच्चे बदबू, कीचड़ और बीमारियों के साये में क, ख, ग सीखने को मजबूर हैं।

इसी गंदगी में लगता है बच्चों का स्कूल।
सपनों का आशियाना बना खंडहर उम्मीदों पर फिर गया पानी ऐसा नहीं है कि भूरी टेकरी के निवासियों को हमेशा से ऐसे ही हालात में रहने के लिए छोड़ दिया गया था। जब पूर्वी रिंग रोड और बायपास के बीच बसे इन परिवारों को विस्थापित किया जा रहा था, तो नगर निगम ने बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। एक मॉडल वन-बीएचके फ्लैट बनाया गया था, जिसमें लिफ्ट, रेंप और हर तरह की आधुनिक सुविधाएं थीं।
निगम के अधिकारियों ने यहाँ की महिलाओं से पूछकर उनकी जरूरत के हिसाब से किचन तक डिजाइन करवाया था। इन्हीं वादों पर भरोसा करके लोग अपना पुराना घर छोड़कर यहां बसने को तैयार हुए थे, लेकिन आज वही बिल्डिंगें रख-रखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो रही हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है।
सीढ़ियां इस कदर टूट चुकी हैं कि उन पर चढ़ना-उतरना खतरे से खाली नहीं है। लिफ्ट कब की बंद हो चुकी है। जिन सपनों के साथ लोगों ने इन घरों में गृह-प्रवेश किया था, वे अब एक बुरे सपने में बदल चुके हैं।

सीढ़ियां टूट चुकी है और यहां चारों तरफ गंदगी का अंबार है।
विपक्ष का आरोप ‘जनता का नहीं, पर्ची वाला महापौर’ शहर के इन बदतर हालातों पर अब सियासत भी गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में ‘वाटर ऑडिट’ अभियान की शुरुआत की है। भागीरथपुरा, मदीना नगर के बाद जब वे भूरी टेकरी पहुंचे, तो वहां के हालात देखकर वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि जो शहर स्वच्छता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, वहां के लोग नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
सिंघार ने सीधे तौर पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मीडिया से चर्चा में तीखे आरोप लगाते हुए कहा, “मैं इन्हें जनता का महापौर नहीं कह सकता, ये ‘पर्ची वाले महापौर’ हैं। इनके कार्यालय में नोट गिनने की मशीन रखी गई है। आखिर महापौर कार्यालय में नोट गिनने की मशीन का क्या काम है? क्या ठेकेदारों से नकद में भुगतान लिया जा रहा है?”
सिंघार ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में संवेदनशीलता की भारी कमी है और नगर निगम अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही के चलते उन्हें खुद मैदान में उतरकर पानी के सैंपल जांचने पड़ रहे हैं।

बिल्डिंगें कमजोर हो चुकी है। सीवेज में गंदगी भरी हुई।
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