राजधानी की सुबह और शाम अब साफ नहीं रहीं। लोगों को जो हल्की धुंध दिख रही है, वह कोहरा नहीं बल्कि स्मॉग है। धूल और प्रदूषण का खतरनाक मिश्रण। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। आंखों में जलन, चुभन, भारीपन और सांस के मरीजों की परेशानी तेजी से
बुधवार को शहर के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स तो 110 से 161 यानी मॉडरेट रहा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक्यूआई कम होने के बाद भी धूल-प्रदूषण का मिश्रण ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। टीटी नगर में भारी ट्रैफिक के कारण ग्राउंड लेवल ओजोन 141 माइक्रोग्राम दर्ज की गई।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह 60 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसका असर विजिबिलिटी पर पड़ रहा है और सुबह इलाके में धुंध छा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण आंखों की नमी घटा रहे हैं, जिससे ड्राई आई, एलर्जी और सांस की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समझें इसकी तीन वजह
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर डॉ. बृजेश शर्मा के अनुसार शहर में स्मॉग के पीछे तीन बड़े कारण हैं, यह धूल, वाहन और मौसम की वजह से है
- धूल-निर्माण कार्य: मेट्रो समेत शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से सड़कें खुली हैं। वाहनों से भी महीन धूल उड़कर हवा में घुल रही है, जो सीधे लोगों के फेफड़ों तक पहुंच रही है।
- वाहन प्रदूषण: पीक आवर्स में रेंगता ट्रैफिक नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसों का स्तर बढ़ा रहा है। खासकर डीजल वाहनों का धुआं स्मॉग को और घना बना देता है।
- मौसम की मार: ठंड में हवा की रफ्तार कम हो जाती है। इससे प्रदूषक कण ऊपर फैलने के बजाय जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं। 10 दिनों तक धूल नीचे जमी रहने से यह स्मॉग बन जाती है।
स्मॉग के दिनों में सुबह की सैर सीमित रखें। बच्चों को खुले मैदान में ज्यादा देर न भेजें और एन 95 या अच्छी क्वालिटी का मास्क जरूर पहनें। एलर्जी, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत है। -डॉ. विकास मिश्रा, सांस संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ
धुंध और स्मॉग में बड़ा फर्क… अक्सर लोग स्मॉग को धुंध समझ लेते हैं, जबकि दोनों में फर्क बड़ा है। धुंध (फॉग) पानी या आसमान से गिरने वाली ओस के सूक्ष्म कणों से बनती है और आमतौर पर ज्यादा खतरनाक नहीं होती। वहीं, स्मॉग धूल (पीएम 2.5, पीएम 10), धुआं और जहरीली गैसों पर धूप के रिएक्शन से बनता है। लंबे समय तक टिके रहने वाले धूल के कण छोटे होकर सांस नली में चिपकते हैं, फिर फेफड़ों, आंखों और दिल को प्रभावित करते हैं।
तेज ठंड से थोड़ी राहत
20 दिन बाद 10 डिग्री के पास पारा, 2- 3 दिन ऐसा मौसम
करीब 20 दिनों तक 10 डिग्री से नीचे रहा शहर का न्यूनतम तापमान मंगलवार को 2.4 डिग्री तक बढ़ा। यह 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह और शाम सर्द हवा का असर बना रहा, लेकिन ठिठुरन गायब हो गई। मौसम विभाग के अनुसार इससे पहले 4 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 11.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री था।
क्यों मिली ठंड से राहत : मौसम विशेषज्ञ एके शुक्ला के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं की रफ्तार में कमी आई है। पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कमजोर पड़ने से बादल और नमी सीमित रही, जिससे रात के तापमान में 2.4 डिग्री तक की वृद्धि दर्ज की गई।
आगे क्या : 11 डिग्री तक रहेगा पारा मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान 9 से 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। दिन में धूप निकलने से दोपहर के समय हल्की गर्माहट महसूस होगी, जबकि सुबह और देर शाम हल्की सर्द हवा चलने की संभावना है।
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