घने कोहरे का असर
घने कोहरे का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में देखने को मिलेगा. इन क्षेत्रों में सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम रहने की आशंका है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है.
शीतलहर का असर
मौसम विभाग ने बताया कि कोहरे के साथ-साथ कोल्ड वेव यानी शीतलहर का असर भी बना रहेगा. कई इलाकों में दिन के तापमान में खास बढ़ोतरी नहीं होगी, जिससे कोल्ड डे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. तेज ठंडी हवाओं के चलते लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा. स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सतर्कता रखने की जरूरत है. सुबह-शाम घर से बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनने, कोहरे में वाहन चलाते समय धीमी गति और फॉग लाइट का उपयोग करने की अपील की गई है.
मौसम विभाग के अनुसार, अगर पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता बनी रही तो आने वाले दिनों में ठंड का असर और बढ़ सकता है. ऐसे में प्रदेशवासियों को अगले कुछ दिन सर्दी से राहत मिलने की संभावना कम ही है.
भिंड और पन्ना में कड़ाके की ठंड
भिंड और पन्ना में नए साल के शुरुआती दिनों में कड़ाके की ठंड ने लोगों को प्रभावित किया है. पिछले दो दिनों से सूर्य की किरणें नहीं दिख रही हैं और मौसम ने ठिठुरन बढ़ा दी है.भिंड जिले में तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जबकि पन्ना जिले में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया. ठंड और घने कोहरे के चलते सड़कें सुनसान हो गई हैं. वाहन चालक अलाव और हेडलाइट का सहारा लेकर चल रहे हैं. बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी लोग कम ही दिखाई दे रहे हैं. सर्दी के इस दौर में लोगों के रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित हुए हैं.
भक्तों ने भी ठंड को देखते हुए देवी-देवताओं के लिए विशेष इंतजाम किए. मंदिरों में भगवान के लिए गर्म वस्त्र और कंबल रखे गए हैं. गर्भगृह में रूम हीटर लगाए गए हैं और गुड़-तिली से बने व्यंजनों का भोग अर्पित किया जा रहा है. मौसम विभाग ने चेताया है कि अगले कुछ दिनों तक शीतलहर और कोहरे का असर बना रह सकता है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई है. ठंड से बचने के लिए अलाव और हीटर का इस्तेमाल भी जारी रहेगा. इस प्रकार नए साल का जश्न इस बार ठंड के चलते फीका रहा, और लोग प्राकृतिक ठंड के बीच अपने घर और मंदिरों में गर्माहट बनाए रखने में व्यस्त हैं.
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