भोपाल | जिस आईपीएस अफसर की मौत दो साल पहले ही हो चुकी थी, उनके हस्ताक्षर वाला पसारा लाइसेंस इस्तेमाल कर एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने संस्कृति विभाग से जुड़े 14 कार्यालयों के लिए टेंडर हासिल कर लिया। यही नहीं, फर्जी लाइसेंस के आधार पर हासिल इस टेंडर से 5 साल में 8 करोड़ से ज्यादा का पेमेंट भी ले लिया।
क्लासिक सिक्योरिटी सर्विस एंड कंसलटेंट के संचालक आरके पांडे को 12 मई 2012 को गृह विभाग से सिक्युरिटी (पसारा) लाइसेंस क्रमांक 438 जारी हुआ था। इसकी वैधता 11 मई 2017 तक थी। इसके आधार पर एजेंसी ने संस्कृति संचालनालय, मप्र संस्कृति परिषद, रवींद्र भवन, पंजाबी साहित्य अकादमी, मप्र नाट्य विद्यालय आदि 14 सरकारी कार्यालयों में गार्ड तैनात किए। 2012 से 2017 तक सब कुछ वैध रहा। 2017 में दोबारा टेंडर निकले, तो संचालक ने पसारा लाइसेंस का फर्जी नवीनीकरण कर फिर काम ले लिया और 2022 तक सेवाएं जारी रखीं।
गृह विभाग का साफ जवाब-हमने कोई लाइसेंस जारी नहीं किया
संस्कृति विभाग ने पहले जनवरी 2022 में महानिरीक्षक कार्यालय (लॉ-ऑर्डर एवं सिक्योरिटी कंट्रोलिंग) और फिर अप्रैल 2022 में गृह विभाग से लाइसेंस की जांच कराई। अप्रैल 2022 में गृह विभाग का साफ जवाब आया कि क्लासिक सिक्योरिटी सर्विस के नाम से मई 2012 से मई 2017 तक ही लाइसेंस जारी किया गया था। इसके बाद कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ। आईपीएस की मौत 2015 में, उनके साइन 2017 में
भास्कर ने 2012-17 और 2017-22, दोनों लाइसेंस की जांच की। दोनों में फर्क सिर्फ जारी होने और वैधता समाप्ति की तारीखों का था। दोनों पर आईपीएस अफसर एसके पांडे, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (लॉ/ऑर्डर एंड सिक्योरिटी), कंट्रोलिंग अथॉरिटी के हस्ताक्षर थे, जबकि उनकी 2015 में ही मौत हो चुकी थी। लाइसेंस फर्जी साबित होने के बाद 2022 में सभी कार्यालयों से एजेंसी के गार्ड हटा दिए गए, लेकिन बकाया बिलों भुगतान नहीं रोका। जीएसटी में भी घोटाला: नंबर ही नहीं था, फिर भी 18% टैक्स बिल में जोड़ा
पड़ताल में यह भी सामने आया कि एजेंसी को 1 अगस्त 2017 को जीएसटी रजिस्ट्रेशन मिला, लेकिन जुलाई 2017 से ही बिलों में 18% जीएसटी जोड़कर भुगतान लिया जा रहा था। बाद में जीएसटी नंबर मिल गया, तब भी वसूली गई जीएसटी राशि सरकार के खाते में जमा नहीं कराई गई। सितंबर 2017 से जून 2022 के बीच एजेंसी ने करीब 90.60 लाख रुपए जीएसटी के नाम पर वसूले, लेकिन यह राशि जमा नहीं की गई। इसी आधार पर नवंबर 2022 में एजेंसी का जीएसटी नंबर कैंसिल कर दिया गया। यह जानना भी दिलचस्प है कि 14 कार्यालयों में सेवाएं देने वाली इस एजेंसी के मात्र 7 कर्मचारियों के नाम ईएसआई पोर्टल पर दर्ज हैं। वहीं एजेंसी के संचालक आरके पांडे के खिलाफ भोपाल के तीन थानों में 9 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
क्या है पसारा लाइसेंस?
ये प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज रेगुलेशन एक्ट-2005(पसारा) के तहत मिलने वाला लाइसेंस है, जो निजी सुरक्षा एजेंसियों को वैध रूप से काम करने के लिए अनिवार्य होता है।
ये मुझे फंसाने की साजिश… हमने कोई फर्जी दस्तावेज लगाकर सिक्योरिटी सेवा नहीं दी हैं। 2017 से 2022 के बीच जो भुगतान मिला, वह अन्य तरह की मेन पावर का है। न कि सिक्योरिटी गार्ड का। यह मुझे फंसाने की साजिश है।’-आरके पांडे, संचालक, क्लासिक सिक्योरिटी एजेंसी जांच चल रही है, अभी कुछ नहीं कह सकते दस्तावेज कूटरचित थे या सही, यह जांच का विषय है। इसमें जांच चल रही है, जो भी निर्णय आएगा, उसके आधार पर कार्रवाई तय होगी। -एनपी नामदेव, संचालक, संस्कृति विभाग, मप्र
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