कलर्स के नए शो ‘डॉ. आरंभि’ के प्रमोशन के लिए भोपाल पहुंची टीम ने गुरुवार को मीडिया से खुलकर बातचीत की। होटल ताज लेकफ्रंट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शो की लीड एक्ट्रेस ऐश्वर्या खरे और अभिनेता आदित्य रेडिज ने अपने करियर, संघर्ष और बदलते मनोरंजन के दौर पर विस्तार से बात की। एक्ट्रेस ऐश्वर्या बोलीं- सादगी ही मेरी पहचान है ऐश्वर्या खरे से जब पूछा गया कि ‘भाग्य लक्ष्मी’ के बाद ‘डॉ. आरंभि’ में भी उनका एक सादगीभरा, पारंपरिक लुक नजर आ रहा है और क्या वे भविष्य में अपने लुक में बड़ा बदलाव करेंगी, तो उन्होंने स्पष्ट कहा-“मुझे इसी लुक में इतने अच्छे शो मिल रहे हैं, तो मैं क्यों बदलूं? जहां रोल की डिमांड होगी, मैं खुद को ढालूंगी, लेकिन साड़ी, लंबे बाल और बिंदी वाला लुक मुझे व्यक्तिगत रूप से पसंद हैं। इससे लोग कनेक्ट भी कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि वे असल जिंदगी में भी बेहद सादगी पसंद हैं। मैं भोपाल से हूं, मिडिल क्लास फैमिली से आती हूं। जींस-टॉप पहनकर निकल जाना ही मेरी स्टाइल है। ज्यादा मेकअप या हाई-फाई लाइफस्टाइल मेरी प्राथमिकता नहीं रही। 12 साल की मेहनत, थिएटर से मिली बुनियाद अपने सफर पर बात करते हुए ऐश्वर्या ने कहा कि मुंबई में उन्हें 12 साल हो चुके हैं और उन्होंने थिएटर से शुरुआत की। अगर कोई एक्टर बनना चाहता है तो सीखकर आए। मैंने दो साल थिएटर किया, वहीं से समझ आया कि मैं इस फील्ड में बेहतर कर सकती हूं। मैंने ऑडिशन देकर काम पाया है। वहां मेरा कोई गॉडफादर नहीं था। 12-13-14 घंटे की शिफ्ट्स की है। संघर्ष आज भी जारी है, क्योंकि एक्टर की नौकरी 9 से 5 की नहीं होती। उन्होंने माना कि टीवी इंडस्ट्री में निरंतर मेहनत जरूरी है, क्योंकि कब शो बंद हो जाए, यह तय नहीं होता। “अगर हम लगातार मेहनत नहीं करेंगे तो सब हाथ से निकल सकता है। पत्रकार पिता से मिलती है ‘कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म’ ऐश्वर्या ने बताया कि उनके पिता पत्रकार रहे हैं। पापा रोज मेरा काम देखते हैं और बहुत ईमानदार फीडबैक देते हैं। कभी कहते हैं आज दांत ज्यादा दिख रहे थे, कभी कहते हैं ये सीन बेहतर कर सकती थीं। मेरे लिए उनका यह कंस्ट्रक्टिव क्रिटिसिज्म बहुत मायने रखता है। सच कहूं तो जितना मेरा खुद का मोटिवेशन नहीं था, उससे ज्यादा मेरे परिवार ने मुझे आगे बढ़ाया। आदित्य रेडिज बोले- टीवी आज भी प्रासंगिक वेब सीरीज और ओटीटी के दौर में टीवी शो की प्रासंगिकता पर आदित्य रेडिज ने कहा कि माध्यम बदलते रहते हैं, लेकिन डेली सोप की अपनी जगह है। समय के साथ ओटीटी आया है, मोबाइल आया है। लेकिन जैसे अखबार पहले भी था और आज भी है, वैसे ही टेलीविजन डेली सोप पहले भी थे और आज भी हैं। एक बड़ा वर्ग है, जो परिवार के साथ बैठकर रोज टीवी देखता है। हम उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ओटीटी पर दर्शक अपनी सुविधा से कंटेंट देखते हैं, लेकिन पारिवारिक ड्रामा और भावनात्मक जुड़ाव टीवी आज भी मजबूत तरीके से पेश करता है।
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