भरतपुर जिले के चिकसाना थाना क्षेत्र के गांव नगला भगत स्थित सरकारी स्कूल में शनिवार दोपहर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्कूल परिसर में एक कमरे के बाहर बने बरामदे की छत की पट्टी अचानक टूटकर गिर गई। घटना के समय कमरे के अंदर कक्षा संचालित हो रही थी, लेकिन शिक्षकों की सतर्कता के कारण सभी बच्चों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। पट्टी गिरते ही परिसर में धूल का गुबार छा गया।
शिक्षक की सूझबूझ से सुरक्षित निकले बच्चे
स्कूल की छठवीं कक्षा की छात्रा जान्हवी के अनुसार शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे शिक्षक प्रवीण कुमार बच्चों को होली के बारे में जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान बरामदे की पट्टियों से आवाज आने लगी। स्थिति को भांपते हुए शिक्षक ने तुरंत सभी बच्चों को बाहर निकालकर दूर खड़ा कर दिया। बच्चों के बाहर निकलते ही बरामदे की पट्टी टूटकर गिर गई। इस पूरी घटना का शिक्षक ने वीडियो भी बनाया। हादसे के बाद बच्चे सहमे हुए नजर आए।
पहले से क्षतिग्रस्त था भवन
बताया गया कि बरामदा पहले से ही क्षतिग्रस्त था और स्कूल प्रशासन ने वहां चेतावनी नोटिस भी चस्पा कर रखा था। कमरे कम होने के कारण मजबूरी में बच्चों को क्षतिग्रस्त कमरों में पढ़ाया जा रहा है। विद्यालय में कुल चार कमरे हैं, जिनकी स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही है और कई कमरों की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं। विद्यालय आठवीं तक है, हालांकि वर्तमान में पहली से सातवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं और करीब 25 बच्चे अध्ययनरत हैं।
ग्रामीणों ने जताई चिंता
घटना के समय पास के ग्रामीण चीख-पुकार सुनकर स्कूल पहुंचे। उन्होंने बताया कि एक कमरे के सामने के बरामदे की छत की पट्टी टूट चुकी थी और धूल का गुबार उड़ रहा था। उन्होंने सबसे पहले बच्चों और शिक्षकों की स्थिति जानी, सभी के सुरक्षित होने पर राहत की सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय भवन की क्षतिग्रस्त स्थिति के बारे में पहले भी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जीर्णोद्धार की मांग
विद्यालय परिसर में अभी भी कई कमरों की दीवारों में दरारें हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से क्षतिग्रस्त भवनों के जीर्णोद्धार की मांग की है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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