भगवान महावीर सेवा संस्थान सीमांत इलाकों में उम्मीद की सबसे मजबूत आवाज बन गया है। पिछले 9 साल में संस्था ने जम्मू, कश्मीर, पंजाब और राजस्थान के बाढ़ प्रभावित गांवों में 210 राहत ट्रक भेजे हैं। इनमें जम्मू में 80, कश्मीर में 55, पंजाब में 45 और राजस्थान में 30 ट्रक राहत सामग्री पहुंची है।
हर ट्रक के साथ भोजन, कपड़े, दवाइयां और जरूरत की चीजें उन परिवारों तक पहुंचीं, जिनके घर बाढ़ से उजड़ गए थे। जैन समाज के उद्योगपति और दानवीर परिवार इस अभियान की रीढ़ बने हुए हैं। यह सेवा आज भी बिना रुके जारी है। राहत के साथ-साथ संस्था ने जीवन संवारने की दिशा में भी बड़ा काम किया है।
सीमा से सटे इलाकों के बच्चों की पढ़ाई में भी संस्था ने अपनी भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर दिए गए हैं। कई गांवों में महिलाओं के लिए सिलाई केंद्र खोले गए हैं। महिलाएं यहां हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। लुधियाना में भी संस्था के कई प्रकल्प चल रहे हैं।
जोगी झोपड़ी इलाके में रहने वाले बच्चों के लिए एक विद्या मंदिर संचालित किया जा रहा है। यहां बच्चों को मुफ्त शिक्षा, स्टेशनरी और संस्कार सिखाए जा रहे हैं। उनकी माताओं के लिए सिलाई केंद्र चलाया जा रहा है, जहां महिलाएं कमाई करके परिवार की मदद कर रही हैं। गरीब परिवारों के सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई का खर्च संस्था उठा रही है।
सरकारी स्कूलों में पानी की कमी दूर करने के लिए वॉटर कूलर लगाए गए हैं। कई स्कूलों में पंखे और जरूरी सामान प्रदान किया गया है। संस्था द्वारा चलाए जा रहे चेरिटेबल डिस्पेंसरी और डेंटल यूनिट में रोजाना कई जरूरतमंद मरीज मुफ्त या बहुत कम खर्च पर इलाज पा रहे हैं।
अस्पतालों में भी बांटीं हैं दवाएं व कराया है फ्री इलाज: संस्थान ने अस्पतालों में भर्ती कमजोर आर्थिक स्थिति वाले मरीजों की भी मदद की है। इलाज के दौरान आने वाला खर्च कई बार संस्था ने अपने स्तर पर उठाया है।
जिसके पास दवाइयों के रुपए नहीं होते तो उनको दवाइयां भी दिलवाईं हैं और कई ऑपरेशन भी फ्री में ही करवाए हैं। इससे कई परिवारों को कठिन समय में सहारा मिला है। इस दौरान कई लोगों का फ्री में इलाज भी करवाया है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों को काफी राहत मिली है।
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