भागलपुर: जिले के नवगछिया अनुमंडल मैदान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक साथ 100 से अधिक कौवों के मौत की खबर सामने आई. स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले दो-तीन दिनों से इस इलाके में कौवे आकर गिर रहे थे और उनकी मौत हो रही थी. अचानक इतनी बड़ी संख्या में कौवों की मौत से लोगों में डर और चिंता का माहौल बन गया. स्थानीय लोग किसी अनहोनी की चिंता जता रहे हैं. बता दें कि शास्त्रों में कौवे को खास महत्व दिया गया है. कौवे को पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है.
मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और पशुपालन विभाग की एक टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया. टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर मृत कौवों का निरीक्षण किया. इसके बाद पूरे इलाके को सैनिटाइज कराया गया. ताकि किसी भी तरह का संक्रमण न फैले. साथ ही मृत कौवों के सैंपल भी लिए गए, जिन्हें जांच के लिए पटना भेजा गया है.
क्या बर्ड फ्लू का है खतरा?
जिला पशुपालन पदाधिकारी अंजली कुमारी सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में बर्ड फ्लू जैसे कोई स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ज्यादा ठंड भी कौवों की मौत की एक बड़ी वजह हो सकती है. हालांकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाएगा.
चल रही है जांच
न्यूज 18 से बातचीत में अंजली कुमारी सिंह ने बताया कि जैसे ही उन्हें कौवों की मौत की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत एक टीम को मौके पर भेजा. टीम ने कौवों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया. कहा जा रहा है कि मौसम का तापमान काफी कम है और यह भी मौत का कारण हो सकता है. इसके अलावा ये आशंका भी जताई जा रही है कि आसपास के बगीचों या खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव किया गया हो, जिससे कौवे प्रभावित हुए हों.
मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से बचें
पशुपालन विभाग की ओर से पूरे इलाके को सैनिटाइज किया गया है और स्थानीय लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है. प्रशासन ने लोगों से कहा है कि जांच रिपोर्ट आने तक उस क्षेत्र में मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक से बचें. साथ ही मृत पक्षियों को हाथ न लगाने और बच्चों को वहां जाने से रोकने की अपील की गई है.
पटना भेजा गया सैंपल
अधिकारियों ने यह भी बताया कि फिलहाल बर्ड फ्लू की कोई ठोस आशंका नहीं दिख रही है, लेकिन पूरी तरह से आश्वस्त होने के लिए सैंपल पटना की लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं. तब तक प्रशासन की टीम लगातार इलाके की निगरानी कर रही है.
कौवे का शास्त्रों में महत्व
शास्त्रों और लोक मान्यताओं में कौवे को खास महत्व दिया गया है. कौवे को पितरों यानी पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि श्राद्ध के समय कौवे को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं. इसके अलावा कौवे को शनिदेव का वाहन भी कहा जाता है. लोग यह भी मानते हैं कि कौवा आने वाली घटनाओं का संकेत देता है. इसी वजह से भारतीय समाज में कौवे को आदर की नजर से देखा जाता है और उसे नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है.
क्या घट रही है कौवें की संख्या
एक्पसर्ट के मुताबिक देशभर में कौवों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक राष्ट्रीय आंकड़ा मौजूद नहीं है. हालांकि बेंगलुरु, पंजाब और केरल जैसे राज्यों से आई स्थानीय रिपोर्ट्स में शहरी इलाकों में कौवों की संख्या कम होने की बात कही गई है. विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से हो रहे शहरीकरण, पेड़ों की कटाई, प्रदूषण और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल का असर पक्षियों पर पड़ रहा है.
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