नवगछिया महादेवपुर घाट की तरफ विक्रमशिला सेतु के स्लैब और गंगा नदी के बीच की दूरी जहाज के लायक नहीं है जबकि बरारी की ओर से विक्रमशिला सेतु के स्लैब की ऊंचाई और गंगा के बीच की दूरी बड़ी जहाज के संचालन के लायक है. ऐसे में इस रास्ते ही धारा मोड़कर जलमार्ग तैयार किया जा रहा है.
आपको बता दें कि पहले भागलपुर से होकर बड़े जहाज का परिचालन हुआ करता था लेकिन, धीरे-धीरे गंगा की धारा मुड़ गई और इसका परिचालन बन्द हो गया. अब एक बार फिर से जहाज के जरिए लोगों का आवागमन हो पाएगा. कहलगांव, बरारी और माणिक सरकार घाट के रास्ते सुल्तानगंज और फिर आगे जहाज का परिचालन सुचारू रूप से हो सके. इसे लेकर रत्तिपूर बैरिया में फिलहाल गंगा में ड्रेजिंग किया जा रहा है. जिलाधिकारी नवल चौधरी ने बताया कि वॉटरवे होने से पर्यटन धार्मिक व्यापारिक और जल यातायात दृष्टिकोण से यह फायदेमंद होगा. नवगछिया महादेवपुर घाट की तरफ विक्रमशिला सेतु के स्लैब और गंगा नदी के बीच की दूरी जहाज के लायक नहीं है जबकि बरारी की ओर से विक्रमशिला सेतु के स्लैब की ऊंचाई और गंगा के बीच की दूरी बड़ी जहाज के संचालन के लायक है. ऐसे में इस रास्ते ही धारा मोड़कर जलमार्ग तैयार किया जा रहा है.
बीच में भी गुजरा था मालवाहक जहाज
आपको बता दें कि बीच-बीच में पानी रहने पर यहां से मालवाहक जहाज गुजरता है. कुछ समय पहले भी चावल लेकर यहां से मालवाक जहाज गुजरा था. हालांकि, किसी कारणवश बीच में ही फंसा रह गया था. अब इसका परिचालन सही से हो इस दिशा में काम किया जा रहा है.
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