भागलपुर की मंजूषा लोककला पांच रंगों से बनती है. इसका संबंध बिहुला विषहरी से है. अब बात करते हैं इसे तैयार कौन करता हैं तो आपको बता दें कि इसको मुख्य रूप से महिलाएं तैयार करती हैं लेकिन, अब पुरुषों के द्वारा भी बड़े पैमाने पर इसे तैयार किया जाने लगा है. आपको बता दें कि मंजूषा पेंटिंग का काफी ज्यादा इस्तेमाल….
मंजूषा कला को कई जगहों पर तीन तो कई जगहों पर पांच रंगों से तैयार किया जाता है. इस पर कई लोग शोध भी कर रहे हैं. ऐसे में शोध के दौरान कुछ लोगों को 5 तो कुछ लोगों को 3 रंगों से तैयार मंजूषा के प्रमाण मिले हैं. ये दोनों ही तरह की पेंटिंग देखने को मिलती है. मंजूषा कलाकार हेमंत कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि देखिए मंजूषा 5 रंगों से तैयार होने वाली कला है. यह पेंटिंग के साथ-साथ एक लिपि भी है यानी कि इससे चित्र के माध्यम से कुछ लिख भी सकते हैं. इसका खास नाता बिहुला विषहरी से है.
अब बात करते हैं इसे तैयार कौन करता हैं तो आपको बता दें कि इसको मुख्य रूप से महिलाएं तैयार करती हैं लेकिन, अब पुरुषों के द्वारा भी बड़े पैमाने पर इसे तैयार किया जाने लगा है. यानी इसे दोनों ही लोग तैयार करते हैं. आपको बता दें कि मंजूषा पेंटिंग का काफी ज्यादा इस्तेमाल घर आए मेहमानों, अतिथियों, प्रोफेसरों, वक्ताओं, नेताओं, अधिकारियों सहित तमाम खास लोगों को सम्मानित करने के लिए किया जाता है. लोगों को मंजूषा कला पर आधारित कपड़े भेंट किए जाते हैं.
भागलपुरी कपड़े पर भी इसे तैयार किया जाता है. यह कपड़े की खूबसूरती को बढ़ा देता है. सम्मानित करने वाले वस्त्र में भी इसे तैयार कर दिया जाता है. अब यह कला सिर्फ भागलपुर या अंग क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रह गया है. यहां से लेकर विदेश तक के लोग इस कला को जानने लगे हैं. कपड़े पर मंजूषा कला को उकेर कर ऐसे कपड़े विदेश भी भेजे जाते हैं.
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