बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के कार्यकर्ताओं और पुलिस-प्रशासन के बीच उस समय तनाव बढ़ गया, जब राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन के लिए बठिंडा जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान बातचीत करने पहुंचे DSP गुरप्रीत सिंह और डिप्टी तहसीलदार को किसान नेताओं ने धरने में बैठा लिया। अधिकारियों को करीब ढाई घंटे तक किसानों के बीच बैठना पड़ा। किसानों का साफ कहना है कि जब तक उनके गिरफ्तार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे अधिकारियों को नहीं छोड़ेंगे और हर हाल में अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे। साथी की रिहाई के लिए कर रहे प्रदर्शन दरअसल, यह पूरा विवाद नौ महीने पुराने एक मामले से जुड़ा है, जिसमें गांव चाउके के बलदेव सिंह और गांव जिजंद के शगनदीप सिंह बठिंडा सेंट्रल जेल में बंद हैं। किसान यूनियन इन दोनों साथियों की तुरंत रिहाई की मांग कर रही है। DSP गुरप्रीत सिंह ने बताया कि प्रशासन ने कल और आज भी किसान नेताओं झंडा सिंह जेठूके और शिंगारा सिंह मान के साथ बैठक की थी। पुलिस का तर्क है कि रिहाई की कुछ कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं जिनमें समय लगता है, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे और बठिंडा स्थित कार्यालय की ओर कूच करने का प्रयास किया, जिसके बाद उन्हें हाईवे पर ही रोकना पड़ा। गतिरोध खत्म करने का प्रयास फिलहाल, जिला प्रशासन लगातार बातचीत के माध्यम से गतिरोध खत्म करने का प्रयास कर रहा है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर कई किसान कार्यकर्ताओं को घरों से भी राउंड अप किया है। DSP ने कहा है कि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी है और अब प्राप्त निर्देशों के आधार पर ही अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनके साथियों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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