जगदलपुर का लालबाग मैदान बस्तर पंडुम के आगाज के साथ ही देश की लोक-संस्कृतियों के महासंगम में तब्दील हो गया। तीन दिवसीय इस महोत्सव के पहले दिन अंतरराज्यीय जनजातीय नृत्यों ने दर्शकों के बीच जगह बना ली। मंच पर अलग-अलग राज्यों के कलाकार उतरे। इस मंच पर भारत की सांस्कृतिक खुशबू दिखी।
पहले दिन की सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह से अन्य राज्यों से आए जनजातीय दलों के नाम रही। मध्यप्रदेश के कलाकारों ने जैसे ही ‘गुदुम बाजा नाच’ की थाप छेड़ी, पूरा मैदान तालियों और जोश से गूंज उठा। वहीं आंध्र प्रदेश के ‘डिमसा नृत्य’ की लयबद्ध चाल और सामूहिक तालमेल ने दर्शकों को एक अलग ही अनुभव दिया। कर्नाटक और तेलंगाना के भी कलाकारों ने किया प्रदर्शन इसके बाद तेलंगाना के ‘लम्बाड़ी’ और कर्नाटक के ‘बंजारा’ नृत्य ने रंग-बिरंगी वेशभूषा और पारंपरिक आभूषणों की चमक से लालबाग मैदान को जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों में बंजारा समुदाय की जीवनशैली और उल्लास साफ झलकता नजर आया। महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने ‘लिंगो नाच’ के जरिए अपनी प्राचीन परंपरा, आस्था और लोककला का प्रभावशाली संगम प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि भाषा और क्षेत्र भले अलग हों, लेकिन सुर, ताल और भावनाओं की भाषा एक होती है। दर्शकों की भारी भीड़ और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया ने बस्तर पंडुम के पहले दिन को यादगार बना दिया है। अब अगले दो दिनों के कार्यक्रमों को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
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