बरनाला में एक सरकारी स्कूल की 8वीं कक्षा की छात्रा को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। इसके विरोध में छात्रा अपने माता-पिता के साथ डीसी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गई। यह मामला बरनाला के गांव ठीकरीवाल के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जुड़ा है। छात्रा दिलप्रीत कौर के पिता सुखविंदर सिंह और माता सुमनदीप कौर ने स्कूल प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रिंसिपल ने उनकी बेटी का भविष्य बर्बाद कर दिया है। परिवार ने बताया कि वे एक गरीब परिवार से हैं और उनकी 5 बेटियां हैं। दिलप्रीत कौर को सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ठीकरीवाल में 8वीं कक्षा की परीक्षा देनी थी। छात्रा का रोल नंबर तो जारी हो गया था, लेकिन परीक्षा में उसका नाम नहीं आया। इससे उसके एक साल बर्बाद होने का खतरा है। उनकी 3 बेटियां इसी स्कूल में पढ़ती थीं। घर आने से रोका तो छात्रा का नाम काटा उसने स्कूल प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल प्रिंसिपल अक्सर उसके घर आता-जाता था। जब घरवालों ने उसे घर से आने से रोका तो प्रिंसिपल ने घरवालों से लड़ाई शुरू कर दी। पहले प्रिंसिपल ने उसकी बड़ी बेटी का नाम 10वीं क्लास से काट दिया, जिसके बाद दूसरी लड़की को स्कूल में जूता चोरी के मामले में बेइज्जत किया। जहां अब 8वीं क्लास में पढ़ रही उसकी लड़की के फाइनल पेपर नहीं हुए हैं, जहां स्कूल रोल नंबर सीट और स्कूल से गैरहाजिरी का मुद्दा बनाकर उसकी बेटी दिलप्रीत कौर को पेपर देने से रोका जा रहा है। परिवार वालों ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से मांग की कि वे गरीब परिवार से हैं और अपनी 5 बेटियों के अच्छे भविष्य के लिए दिन-रात दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, लेकिन प्रिंसिपल ने गुस्से में आकर उनकी बेटियों का भविष्य दांव पर लगा दिया। परिवार ने दी जान देने की चेतावनी उन्होंने मांग की कि इस स्कूल प्रिंसिपल की पूरी जांच हो और कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने अपनी बेटी का भविष्य पेपर में दर्ज कराने की भी इजाजत मांगी है। ताकि उनकी बेटी का भविष्य खराब न हो। माता-पिता ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वे अपनी जान दे देंगे, नहीं तो स्कूल प्रिंसिपल जिम्मेदार होगा। जब स्कूल प्रिंसिपल से इस मामले में मीडिया से बात करने के लिए कहा गया तो उन्होंने मीडिया के सामने से मना कर दिया। DC ने परिवार को दिया आश्वसन दूसरी तरफ, इस मामले में डिप्टी कमिश्नर बरनाला हरप्रीत सिंह ने कहा कि परिवार से बात हो गई है। उन्होंने कहा कि स्कूल में कम अटेंडेंस होने की वजह से शिक्षा विभाग ने उन्हें पेपर में नहीं बैठाया। लेकिन शिक्षा विभाग बरनाला ने लिखित पेपर करवाने के लिए इसे उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। जिसका आखिरी फैसला शिक्षा विभाग ही लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर परिवार को जानबूझकर परेशान करने की बात सामने आती है, तो जांच की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करते हुए पाया जाता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
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