बाड़मेर विधिक सेवा प्राधिकरण की सेक्रेटरी ने आज प्राइवेट स्कूल की बाल वाहिनियों का निरीक्षण किया। डेजी डेंस स्कूल बाड़मेर की बाल वाहिनी में ओवरलोड बच्चों को देखकर सेक्रेटरी भड़क गई कहा- यह क्या जानवर है जो इस तरीके से ठूंस दिया, और कोई कमी रह गई त
आरटीओ ने कार्रवाई करते हुए बसों समेत 18 बाल वाहिनियों को सीज किया गया। बाल वाहिनियों में डॉक्यूमेंट, मॉडिफाइड सीटें होना पाई गई है। वहीं बाल वाहिनियों में कैमरे, और जीपीएस भी नहीं लगे हुए थे।
निरीक्षण के दौरान सदर थाने के एएसआई, आरटीओ इंस्पेक्टर रमेश चावड़ा मौजूद रहें।
दरअसल, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने सभी जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरण को बाल-वाहिनियों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए थे। इस पर बाड़मेर विधिक सेवा प्राधिकरण सेक्रेटरी और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्णा गुप्ता ने पुलिस और आरटीओ टीम के साथ बुधवार को डेजी डेंस इंटरनेशनल स्कूल पहुंची। वहां पर स्कूल बाल वाहिनी बसों में ओवरलोड बच्चों को देखकर सेक्रेटरी भड़क गई। ड्राइवरों को खरी-खरी खोटी सुनाई। सेक्रेटरी का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने गुमराह किया। कभी 4 तो कभी 6 बाल वाहिनी होना बताई लेकिन 8-10 बाल वाहिनी स्कूल में पहुंची थी। वहीं स्कूल प्रशासन ने कोई सहयोग नहीं किया। सेक्रेटरी ने कहा कि बच्चों की सिक्योरिटी से कोई लेना नहीं है केवल फीस मतलब है।
आरटीओ इंसपेक्टर रमेश चावड़ा का कहना है कि- सीजेआई मैडम के साथ में डेसी डेंज इंटरनेशनल स्कूल में कार्रवाई की गई है। स्कूल के बस डॉक्यूमेंट की जांच कर रहे है। गलत पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बसों में मॉडिफाइड किए हुए है और बच्चे क्षमता से ज्यादा बैठा रखे है। कुछ बसों के डॉक्यूमेंट पूरे नहीं है। डॉक्यूमेंट देखकर कार्रवाई की जाएगी। आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
सचिव कृष्णा गुप्ता ने बताया- स्कूल में बाल वाहिनियां होती है उसको हमने आज निरीक्षण किया है। मेरा पेंरेट्स से अपील है कि अपने बच्चें कैसे स्कूल जा रहे है बाल वाहिनियों में बैठने के लिए सीट है या नहीं। उसकी कैपेसिटी क्या है। जब कल कोई हादसा होता है तो हम रोते है। हमारे साथ यह हो गया। थोड़ा जागरूक उनको बनना चाहिए। थोड़े से 100-200 रुपए खातिर आपके बच्चों की स्थिति दयनीय हो रखी है। जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर बैठाया हुआ है। एक बस या टैंपो जितनी केपिसिटी से उससे डबल बच्चों को बैठाया जा रहा है। जानवर की स्थिति है उससे भी बुरा हाल है।
जब हम आए तब स्कूल प्रशासन का कहना है कि हमारी चार बसें है। उसके बाद 6 बसें बताई, जब मैंने यहां पर स्थिति देखी है तब यहां 8-10 बसें यहां पर खड़ी है जो उनके नाम से चल रही है। उसमें उसका लोगों है स्कूल का नाम है। वो कह रहे है कि हमारी नहीं है। जब उनकी नहीं है तो उनके स्कूल का नाम और लोगों कैसे लग गया। जो ड्राइवर बैठा है उसकी वर्दी पर लोगों लगा हुआ है। यह कौनसे खाते में इस तरीके से गाडियों को घुमा रहे है। ड्राइवर बहानेबाजी कर रहे है। स्कूल प्रशासन कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है। बाहर निकल कर भी नहीं आया है। इसलिए हम इनके खिलाफ जो भी कार्रवाई होगी वो करेंगे।
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