पश्चिम सरहद पर बसा बाड़मेर में गर्मियों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है. ऐसे हालात में छोटे पक्षी, नीलगाय, चिंकारा जैसे जीव पानी के अभाव में दूर-दूर तक भटकते हैं. इस समस्या को देखते हुए पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित ने अपने स्तर पर जल संरक्षण और वन्यजीवों की प्यास बुझाने का संकल्प लिया है. वे वन्यजीवों के विचरण करने वाले स्थानों पर जलकुंड तैयार कर रहे है जिससे वे पानी की टंकियों से भरवाते हैं.
पर्यावरण प्रेमी की पहल से बुझेंगे जीवों की प्यास
भीषण गर्मी की आहट के साथ ही बाड़मेर के पर्यावरणविद् नरपत सिंह राजपुरोहित ने इस वर्ष जल संरक्षण और वन्यजीवों के लिए राहत कार्य समय से पहले ही शुरू कर दिया है. हर साल होली के बाद शुरू होने वाली जलकुंड भरने की मुहिम इस बार होली से पहले प्रारंभ की गई है, ताकि बढ़ते तापमान में बेजुबान जीवों को पानी के लिए भटकना न पड़े.
6 वर्षो से 9 जलकुंडों को भरते आ रहे हैं पानी
ग्रीन डेजर्ट संस्थान के जनसहयोग से पिछले 6 वर्षों से लगातार 9 जलकुंडों में नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है. ये जलकुंड रेगिस्तानी क्षेत्र के वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहे हैं. इन जलस्रोतों पर हिरण, खरगोश, लोमड़ी, मोर, बाज, ईगल, उल्लू, डेजर्ट कैट, सैंड ग्राउस, नाइटजार सहित अनेक वन्यजीव पानी पीने पहुंचते हैं. इसके साथ ही सैकड़ों गाय भी यहां अपनी प्यास बुझाती हैं.
300 जलकुंड बनाने का है लक्ष्य
दूधरलाई नाड़ी की गोद में स्थित जलकुंड पश्चिम राजस्थान का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ जलकुंड माना जाता है, जिसकी क्षमता 1 लाख 12 हजार लीटर है. भीषण गर्मी में यह जलस्रोत हजारों जीवों के लिए संजीवनी का कार्य करता है. ग्रीनमैन नरपत सिंह का लक्ष्य अब जनसहयोग से 300 से अधिक जलकुंडों का निर्माण करना है ताकि पूरे क्षेत्र में वन्यजीवों और मूक प्राणियों को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध मिल सकेगा.
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