गुमला के पालकोट स्थित पम्पापुर पर्वत की चोटी पर विराजित वैद्यनाथेश्वर मनोकामना शिवलिंग आस्था का बड़ा केंद्र है. रामायण कालीन सुग्रीव गुफा और शबरी आश्रम के साक्ष्यों से युक्त यह स्थल धार्मिक व प्राकृतिक रूप से समृद्ध है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना महादेव पूर्ण करते हैं.
मनोकामना शिवलिंग की महिमा
मंदिर के पुजारी रामू बाबा के अनुसार, इस शिवलिंग को ‘मनोकामना शिवलिंग’ के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर आता है, महादेव उसकी झोली खाली नहीं रहने देते. चाहे नौकरी हो, व्यापार, संतान सुख या गंभीर शारीरिक व्याधियां बाबा वैद्यनाथेश्वर सभी कष्टों को दूर करते हैं. ऊंचाई और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों भक्त यहाँ मत्था टेकने पहुंचते हैं.
रामायण काल से जुड़ाव
यह स्थान केवल शिव भक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अनुयायियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार, इस पर्वत और इसके आसपास सुग्रीव गुफा स्थित है, जहां वानर राज सुग्रीव ने शरण ली थी. माता शबरी का आश्रम और मतंग ऋषि की कुटिया के अवशेष आज भी यहां की प्राचीनता को दर्शाते हैं. वहीं, पर्वत की इसी श्रृंखला में मां पम्पा भवानी का प्राचीन मंदिर भी है.
प्रकृति और अध्यात्म का संगम
पालकोट प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर स्थित यह स्थान सुकून और शांति का प्रतीक है. पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के बाद भक्तों को एक अलग ही दिव्य शांति का अनुभव होता है. यहां का शांत वातावरण और मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. पुजारी जी का कहना है कि ऊंचाई देखकर घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि यहां पहुंचने के बाद मिलने वाला आत्मिक संतोष सारी थकान मिटा देता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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