पिथौरागढ़: हिंदू परंपरा में तुलसी को पवित्र माना जाता है. तुलसी के पत्ते सूर्योदय के बाद सुबह तोड़ना शुभ होता है. रविवार, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या और सूर्यास्त के बाद तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए. पत्ते तोड़ने से पहले हाथ साफ रखें और मन में श्रद्धा रखें. बिना कारण तुलसी न तोड़ें, केवल पूजा या प्रसाद के लिए जरूरत भर पत्ते लेना ही शुभ माना जाता है.
हिंदू परंपरा में तुलसी को सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि माता का रूप माना जाता है. घर के आंगन में लगी तुलसी सकारात्मक ऊर्जा, शुद्धता और सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. इसलिए तुलसी की पूजा रोज़ की जाती है और इसे बहुत सम्मान के साथ रखा जाता है.

तुलसी के पत्ते हमेशा सुबह के समय तोड़ना शुभ माना गया है. सूर्योदय के बाद, जब वातावरण शुद्ध और ताज़ा होता है, तब पौधा भी ऊर्जावान माना जाता है. सुबह स्नान के बाद, साफ कपड़े पहनकर और श्रद्धा के साथ तुलसी के पत्ते तोड़ने चाहिए. ऐसा करने से पूजा का फल भी शुभ माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं और पंडित अनिल जोशी के अनुसार रविवार, एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए. उनका कहना है कि इन दिनों तुलसी माता विश्राम करती हैं. इसके अलावा अमावस्या और संध्या समय, यानी सूर्यास्त के बाद भी तुलसी तोड़ना वर्जित माना गया है. इन नियमों का पालन करना शुभ और पुण्यकारी माना जाता है.
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तुलसी विशेष रूप से भगवान विष्णु और उनके अवतारों को बहुत प्रिय मानी जाती है. इसलिए तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण, भगवान राम और शालिग्राम जी को चढ़ाए जाते हैं. बिना तुलसी के भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है. श्रीकृष्ण को भोग लगाते समय भी तुलसी दल अवश्य रखा जाता है.

पंडित अनिल जोशी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि तुलसी भगवान शिव को नहीं चढ़ाई जाती. शिव जी को बेलपत्र, धतूरा और आक अधिक प्रिय माने जाते हैं. इसी तरह माता दुर्गा और भगवान गणेश को भी तुलसी अर्पित नहीं की जाती.

मान्यता है कि तुलसी माता भगवान विष्णु को समर्पित हैं, इसलिए उन्हें विष्णु स्वरूपों को ही अर्पित किया जाता है. हर देवी-देवता की अपनी प्रिय वस्तुएं होती हैं, उसी अनुसार पूजा की जाती है.

तुलसी के पत्ते तोड़ने से पहले हाथ साफ होने चाहिए. मन में श्रद्धा और सम्मान होना चाहिए. कभी भी गुस्से या जल्दबाजी में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए. बिना किसी कारण के तुलसी के पत्ते तोड़ना सही नहीं माना जाता. पूजा, प्रसाद या औषधि के लिए जितनी जरूरत हो, उतने ही पत्ते लेने चाहिए.
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