Pradosh Vrat: ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने कहा कि माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी 2026 की शाम 8बजकर 16 मिनट से आरंभ होगी और 16 जनवरी 2026 की रात 10बजकर 21 मिनट तक रहेगी.
प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को किया जाता है. एक बार शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में. मान्यता है कि जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में पड़ती है, उसी दिन प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है. इस समय भगवान शिव की आराधना करने से साधक को शीघ्र फल की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं.तो आईये देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते है की कब है माघ माह का पहला प्रदोष व्रत क्या बन रहा है शुभ संयोग?
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी 2026 की शाम 8बजकर 16 मिनट से आरंभ होगी और 16 जनवरी 2026 की रात 10बजकर 21 मिनट तक रहेगी. इस वर्ष यह प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, जिस कारण इसे विशेष रूप से शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत दांपत्य जीवन, प्रेम संबंध और भौतिक सुखों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.
बन रहा है अत्यंत शुभ संयोग
इस बार माघ माह के पहले प्रदोष व्रत पर एक अत्यंत शुभ संयोग भी बन रहा है. इस दिन प्रदोष व्रत के साथ-साथ मासिक शिवरात्रि भी पड़ रही है.जिससे इस व्रत का महत्व दोगुना हो जाता है.ऐसे दुर्लभ संयोग में की गई शिव पूजा, रुद्राभिषेक और जप-तप का फल कई गुना बढ़ जाता है. माना जाता है कि इस दिन की गई साधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं.
नहीं बन रहा है कोई कार्य तो जरूर रखे यह व्रत
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के जीवन में लंबे समय से कार्य सफल नहीं हो रहे हों.बार-बार बाधाएं आ रही हों या मानसिक तनाव और पारिवारिक समस्याएं बनी हुई हों, तो उसे प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए. प्रदोष व्रत करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा शांति का वास होता है.श्रद्धा, उपवास और दान-पुण्य के साथ किया गया यह व्रत शिव कृपा पाने का एक श्रेष्ठ माध्यम माना गया है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.