आशुतोष ने बताया कि उनकी तैयारी की यात्रा आसान नहीं रही। उन्होंने वर्ष 2020 में सिविल जज बनने का लक्ष्य तय किया था। वर्ष 2022 में वकालत पूरी करने के बाद उन्होंने प्रैक्टिस के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान कई चुनौतियां आईं, लेकिन परिवार, गुरुजनों और मित्रों के सहयोग से वे कभी हिम्मत नहीं हारे।
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आशुतोष शर्मा ने कहा कि राजस्थान सिविल जज परीक्षा में मुझे 12वीं रैंक मिली है। यह सफर काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा। 2020 से इसकी तैयारी कर रहा था। 2022 में वकालत पूरी हुई और इसके बाद काम के साथ पढ़ाई करता रहा। इस सफलता का श्रेय मैं अपने परिवार, गुरुजनों और मित्रों को देता हूं। जब भी परेशानी या तनाव महसूस हुआ, उन्होंने मुझे प्रेरित किया। युवाओं को मेरा संदेश है कि धैर्य और मेहनत से सफलता जरूर मिलती है।
आशुतोष के पिता गणेश कुमार शर्मा ने कहा कि मेरा बेटा बचपन से ही मेहनती और जुनूनी रहा है। आज उसने जज बनकर न केवल अपना बल्कि मेरा भी सपना पूरा कर दिया है। मुझे उस पर गर्व है।
आशुतोष शर्मा की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिश्रम और धैर्य के साथ अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। भीलवाड़ा का यह होनहार बेटा अब न्याय के क्षेत्र में सेवा की नई जिम्मेदारी निभाने को तैयार है।
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