फौज के बाद भी देश सेवा जारी रखने के अभियान के तहत भारतीय सेना पूर्व सैनिकों को डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उद्देश्य न केवल उन्हें रोजगार के नाम पर आर्थिक शोषण से बचाना है बल्कि उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को फिर से देश की सुरक्षा में लगाना भी है।
देश में लगभग 24 प्रतिशत पूर्व सैनिक पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में रहते हैं। हर साल करीब 60 हजार जवान सेवानिवृत्त होते हैं। थल सेना, वायुसेना और नौसेना में सेवाएं देने के बाद अधिकांश पूर्व सैनिक या तो एक्स सर्विसमैन कोटे के तहत सरकारी नौकरी में जाते हैं, या प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों में शामिल होकर आर्थिक और सम्मान संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं।
खुशबीर दत्त, महासचिव, एक्स सर्विसमैन वेलफेयर कमेटी, बताते हैं कि प्राइवेट एजेंसियों में काम करने वाले पूर्व सैनिक न केवल आर्थिक शोषण का शिकार होते हैं, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा का अधिकार भी नहीं मिलता। ऐसे में डीएससी ज्वाइन करना उनके लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक विकल्प है।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि शिविरों और अन्य माध्यमों से पूर्व सैनिकों को डीएससी में शामिल होने के लाभों से अवगत कराया जा रहा है। उन्हें सिक्योरिटी गार्ड या डीएससी जवान के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है और ज्वाइनिंग के वित्तीय व करियर लाभों की जानकारी भी दी जाती है। सेना का उद्देश्य है कि पूर्व सैनिकों की विशेषज्ञता और अनुभव को दोबारा देश सेवा में लगाया जाए और उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं।
पूर्व सैनिकों को होंगे यह फायदे
- 57 साल तक नौकरी की सुरक्षा।
- सिपाही और लायंस नायक को जोनल पोस्टिंग और रेगुलर प्रमोशन।
- संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति योजना (एमएसीपी) का लाभ।
- ऑनरेरी कमिशन और मिलिट्री अस्पताल की सुविधा।
- रेगुलर आर्मी जैसे वेतन और भत्ते, डीएसपी पैकेज।
- डबल डीए सैलरी, नई पेंशन, एचआरए, सीईए व हॉस्टल सब्सिडी।
- 37.5 लाख तक जीवन बीमा और ईसीएचएस की सुविधा।
- दूसरी सर्विस पेंशन, 15 साल की सर्विस पर, दोनों पेंशन पर डीए।
- डीएससी में पूर्व सैनिकों को सर्विस जवानों और अफसरों से अधिक वित्तीय लाभ।
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