सीएनजी के ट्रांसपोर्टेशन खर्चे के नाम पर जनता काे लूटा जा रहा है। हालत यह है कि देश में सबसे महंगी सीएनजी चूरू और बीकानेर में बेची जा रही है। दोनों जिलाें में ग्राहकों से प्रति किलो 18 रुपए तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। भास्कर पड़ताल में चौंकाने वाला खु
चूरू के पड़ोसी शहर पिलानी व फतेहपुर में 91.41 रुपए किलो सीएनजी मिल रही है। रतनगढ़ से फतेहपुर की दूरी 35 किमी है। वहीं, पड़ोसी राज्य हरियाणा के झूंपा में 87.75 व लुहारू में 86.50 रुपए किलो में ही सीएनजी बेची जा रही है। कंपनी का तर्क- यहां पाइपलाइन नहीं होने से जयपुर से गैस मंगानी पड़ती है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से रेट ज्यादा है।
भास्कर सवाल: कंपनियों के लिए नियम क्यों नहीं? सरकार कंपनियों के लिए अधिकतम रेट को लेकर नियम क्यों नहीं बना रही हैं, ताकि जनता से लूट का यह खेल बंद हो।
“यहां सीएनजी पाइपलाइन नहीं है, गैस जयपुर से मंगानी पड़ती है। इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है। इसी वजह से यहां रेट अधिक हैं।” -जीपी बरवा, बिजनेस हेड, चूरू-बीकानेर, गैसोनेट कंपनी
“चूरू में सीएनजी सबसे महंगे दामों में बिक रही है। कई बार शिकायत करने के बाद भी कंपनी अपनी मनमानी पर अड़ी हुई है। सीधा नुकसान उपभोक्ताओं को हो रहा है। हर जगह सीएनजी की रेट कम है। बावजूद यहां इस तरह ज्यादा रेट लेना ग्राहकों के साथ धोखा है।” -डॉ. कुलदीप पूनिया, जिलाध्यक्ष, जिला पेट्रोलियम एसोसिएशन, चूरू
भास्कर इनसाइट- जयपुर से ट्रांसपोर्टेशन का सिर्फ बहाना
भास्कर ने जब एक्सपर्ट्स से बात की, ताे सामने आया कि प्राइवेट कंपनियां ट्रांसपोर्टेशन खर्चे का सिर्फ बहाना बनाती हैं। क्योंकि ऐसा हाेता ताे बीकानेर में सीएनजी की रेट ज्यादा हाेती। जयपुर से बीकानेर की दूरी 335 किमी है, जबकि जयपुर से चूरू 205 किमी है। यदि ट्रांसपोर्टेशन पर लगने वाले खर्चे से रेट तय होती ताे गैसोनेट कंपनी दोनों जिलाें में एक समान रेट नहीं रखती।
दोनों जिलों में हर माह 83 लाख ज्यादा वसूल रहे हैं
चूरू जिले के 4 पंपों पर प्रतिदिन औसतन 5 हजार किलो सीएनजी बिक्री होती है। वहीं, बीकानेर जिले के 7 पंपों पर रोज 8 हजार किलो सीएनजी बिकती है। 109.25 रुपए किलो के हिसाब से चूरू में हर माह 1.63 करोड़ व बीकानेर में 2.62 करोड़ रुपए की सीएनजी गैस बिक रही है। अब प्रति किलो औसतन 88 रुपए के हिसाब से सीएनजी गैस खपत के आंकड़े जोड़ें तो चूरू में हर महीने 32 लाख व बीकानेर में 51 लाख रुपए ग्राहकों से ज्यादा वसूले जा रहे हैं।
2023 में 88 रु. थी रेट, इसके बाद लगातार बढ़ोतरी
5 मई 2023 को चूरू में सीएनजी पंप शुरू हुए थे। तब 88 रु. प्रति किलो रेट थी। कंपनी ने मनमर्जी से रेट बढ़ाई। इस साल 17 नवंबर को 109.25 रु. तक पहुंचा दी। केंद्र ने रेट कम की तब भी कंपनी ने कम करने की जगह बढ़ाई थी।
सरकार-कंपनियों को एक रेट जैसा ब्रिज बनाने की जरूरत है, कंपनियां अपनी मोनोपॉली चलाती हैं सीएनजी बेचने वाली कंपनियां सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं। इन कंपनियों को अलग-अलग क्षेत्र दे दिए जाते हैं। इन क्षेत्रों में वही कंपनी पंप देगी और काम कर सकेगी। कॉम्पीटिशन नहीं हाेने के कारण वे मोनोपॉली चलाकर अपने हिसाब से रेट तय कर लेते हैं। सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। एक ही स्टेट में रेट में इतना अंतर नहीं होना चाहिए।
अगर किसी कंपनी का ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा ज्यादा होता है, तो उसे दो-तीन रुपए बढ़ाने की इजाजत होनी चाहिए। सरकार व कंपनियों को रेट का एक ब्रिज बनाने की जरूरत है। आज की तारीख में 24 प्रतिशत सीएनजी बिक्री होती है। 18 प्रतिशत डीजल, 53 प्रतिशत डीजल व पांच प्रतिशत अन्य। सीएनजी गरीब का तेल है। एवरेज अच्छी है। लगातार पंप बढ़ रहे हैं।
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