Alwar News: अलवर जिले के कई इलाके मेवात क्षेत्र में आते हैं ऐसे में मेवात के वीर सेनानी शहीद राजा हसन खां मेवाती का शहीदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान खिराज ए अकीदत पेश की गई. अलवर के बहरोड रोड शहीद राजा हसन खां मेवाती के पैनोरमा पर आयोजित समारोह में शहीद राजा हसन का मेवाती के विचारों और देश के प्रति उनकी शहादत पर प्रकाश डाला गया.
समारोह के दौरान वक्ताओं ने बताया कि शहीद राजा हसन खां मेवाती ने देश की एकता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. उनके जीवन से राष्ट्रभक्ति, साहस और धार्मिक सौहार्द की प्रेरणा मिलती है.
पैनोरमा में भेंट किया गया वाटर कूलर
शहीदी दिवस के अवसर पर हसन खां मेवाती के पैनोरमा में दिल्ली से आए असलम गोरवाल द्वारा एक वाटर कूलर भेंट किया गया. इसका फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर कई सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे. आर्यन जुबेर ने कहा कि हसन खां मेवाती ने देश में अनेकता में एकता की मिसाल कायम की थी. उन्होंने राणा सांगा के साथ मिलकर बाबर की सेना का डटकर सामना किया था. उन्होंने बताया कि हसन खां मेवाती हमेशा देश को सर्वोपरि मानते थे और राष्ट्र की रक्षा के लिए हर समय बलिदान देने के लिए तैयार रहते थे. उन्होंने मुगल आक्रमणकारी सेनाओं से कई बार मुकाबला किया और मेवात क्षेत्र के साथ-साथ पूरे देश का गौरव बढ़ाया.
विद्वानों और कलाकारों का करते थे सम्मान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि शहीद राजा हसन खां मेवाती विद्वानों और कलाकारों का विशेष सम्मान करते थे. उन्हें शायरी का भी शौक था और वे स्वयं भी शायरी किया करते थे. उनके जीवन से राष्ट्रभक्ति, धार्मिक सौहार्द और अनेकता में एकता की भावना सीखने को मिलती है.
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बताया कि हमें गर्व है कि हसन खां मेवाती के पिता अलावल खान थे. दिल्ली से अलवर आए असलम गोरवाल ने बताया कि शहीद राजा हसन खां मेवाती ने बाबर के साथ युद्ध लड़ते हुए 12 हजार मेवाती घुड़सवार सैनिकों के साथ खानवा के युद्ध में वीरगति प्राप्त की थी. उन्होंने देश में भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश की थी.
हर साल मनाया जाता है शहीदी दिवस
हर वर्ष 15 मार्च को पूरे मेवात क्षेत्र में जगह-जगह शहीद राजा हसन खां मेवाती का शहीदी दिवस मनाया जाता है. इस बार अलवर में यह समारोह हसन खां मेवाती विकास मंच अलवर के तत्वावधान में आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष शालिम हुसैन ने की और उन्होंने वीर शहीद हसन खां मेवाती के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला. इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध भापांग वादक गफूरुद्दीन मेवाती ने लोकगीत प्रस्तुत कर हसन खां मेवाती को श्रद्धांजलि दी और अपने विचार साझा किए.
राणा सांगा के साथ लड़ा बाबर से युद्ध
कार्यक्रम में मौजूद अलवर निवासी प्रकाश गंगावत ने बताया कि हसन खां मेवाती ने धर्म से पहले देश को चुना था. जब बाबर ने उन्हें उनके धर्म का हवाला देकर अपने साथ आने का प्रस्ताव दिया, तो हसन खां मेवाती ने उसे ठुकरा दिया. उन्होंने राणा सांगा को अपना भाई मानते हुए उनके साथ मिलकर बाबर के खिलाफ युद्ध लड़ा. इसी युद्ध में वीरता से लड़ते हुए हसन खां मेवाती शहीद हो गए और इतिहास में अमर हो गए.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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