अलवर शहर में स्कीम 10बी के निकट दीवानजी का बाग के नाम से मशहूर जमीन के सभी 11 पट्टों को खारिज कर दिया है। यहां करीब 9 बीघा जमीन नियमों के विपरीत जाकर पहले 90ए की गई। उसके बाद अधिकारियों ने पट्टे जारी कर दिया। अब शिकायत के बाद अलवर कलेक्टर ने मामले की जांच कराई। जांच में पाया गया कि पट्टे गलत दिए हैं। जो कि ग्रीन बेल्ट का एरिया है। मास्टर प्लान का उल्लंघन करते हुए पट्टे दिए गए। नगर निगम के कमिश्रन सोहन सिंह नरूका ने बताया कि सभी 11 पट्टे निरस्त कर दिए हैं। एडीएम सिटी बीना महावर ने जांच रिपोर्ट में स्कीम-10बी के समीप स्थित दीवानजी के बाग की करीब 2 हेक्टेयर जमीन के भू-रूपांतरण को गलत माना है। मामले में लिप्त अधिकारियों पर भी गाज गिरने के संकेत हैं। यह जमीन वर्ष 1980 में यूआईटी ने स्कीम-10बी योजना के तहत अवाप्त की थी। बाद में सरकार ने इसे बाग के रूप में बनाए रखने की शर्त पर आवाप्ति से मुक्त किया था। वर्ष 2010 के मास्टर प्लान में भी इसे ग्रीन बेल्ट में शामिल किया गया। इसके बावजूद वर्ष 2021 में नगर निगम स्तर पर इस जमीन की 90ए कर दी गई। उसके बाद 11 पट्टे जारी कर दिए गए। इसके बाद जमीन पर प्लॉटिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई। ये पूरा खेल पूर्व आयुक्त जोधाराम का तत्कालीन नगर निगम आयुक्त जोधाराम विश्नोई ने यह पूरा खेल किया था। सब नियमों को ताक पर रखकर जमीन की 90ए कर दी। उसके बाद पूर्व कमिश्नर जितेंद्र सिंह नरूका के समय पट्टे जारी कर दिए। अब पता चला तो शिकायत के बाद अलवर कलेक्टर ने जांच कराई। जांच में पूरा फर्जीवाड़ा पकड़े में आ गया। अब पट्टे निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। एडीएम सिटी की रिपोर्ट में उल्लेख है कि खसरा नंबर 1256, 1259 व 1260, ग्राम अलवर नंबर-1 की भूमि मास्टर प्लान व जोनल प्लान में ग्रीन/उद्यान के रूप में दर्ज है। रिपोर्ट में हाईकोर्ट के 12 जनवरी 2017 के फैसले (गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) का हवाला देते हुए कहा गया है कि पार्क, ओपन स्पेस, खेल मैदान, रिक्रिएशनल व इको सेंसिटिव जोन की भूमि का अन्य प्रयोजनार्थ भू-उपयोग परिवर्तन निषिद्ध है। ऐसे में इस जमीन का आवासीय कन्वर्जन नियमों के विपरीत है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.