Pushkar Shat Gayatri Mahayagya News: अजमेर के पुष्कर में आज से 43 दिवसीय ‘शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ’ शुरू हुआ है. पूज्य प्रखर जी महाराज के सानिध्य में 2000 पंडित 200 हवन कुंडों पर 27 हजार करोड़ मंत्रों का जप करेंगे. विश्व शांति और कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस यज्ञ में शास्त्रों के मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है. आयोजकों के अनुसार, यह अनुष्ठान दुनिया को वर्तमान चुनौतियों और संघर्षों से मुक्ति दिलाने में सहायक होगा.
महायज्ञ के मुख्य संयोजक सुशील ओझा ने इस भव्य आयोजन के पीछे के गूढ़ उद्देश्यों पर प्रकाश डाला है. उन्होंने बताया कि पूज्य महाराज को अपनी दिव्य दृष्टि से लगभग एक वर्ष पहले ही यह पूर्वाभास हो गया था कि आने वाला समय वैश्विक स्तर पर चुनौतियों, संघर्षों और अशांति से भरा हो सकता है. इसी भविष्य की चिंताओं को देखते हुए देश और दुनिया को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने के लिए इस महायज्ञ की रूपरेखा तैयार की गई थी. वर्तमान में विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध, तनाव और सामाजिक वैमनस्य से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से यह अनुष्ठान किया जा रहा है. इसमें संपूर्ण भारत समाज और विश्व समाज के कल्याण की भावना निहित है. आयोजकों का मानना है कि गायत्री मंत्र की शक्ति से न केवल सनातन धर्म की पताका सुदृढ़ होगी, बल्कि मानवता के बीच प्रेम और भाईचारे का संदेश भी प्रसारित होगा.
शास्त्रों के मानकों पर सटीक तैयारी
इस महायज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शास्त्रीय शुद्धता है. सुशील ओझा के अनुसार, यज्ञ शाला में बनाए गए सभी 200 हवन कुंडों का आकार पूर्णतः प्राचीन शास्त्रीय मानकों के अनुसार तय किया गया है. इन कुंडों के निर्माण में एक मिलीमीटर का भी अंतर नहीं रखा गया है, क्योंकि शास्त्रों में हवन कुंड को मां भगवती का मुख माना जाता है और इसमें रत्ती भर की भी त्रुटि स्वीकार्य नहीं होती. इसके अलावा, हवन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री का अनुपात भी विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित किया गया है ताकि आहुति का पूर्ण फल प्राप्त हो सके. यज्ञ में सम्मिलित होने वाले यजमानों के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं. केवल उन्हीं भक्तों को आहुति देने का अवसर मिलेगा, जिनका पहले विधिवत प्रायश्चित कर्म कराया जाएगा और शास्त्रानुसार संकल्प दिलाया जाएगा. यह अनुशासन इस महायज्ञ की गंभीरता और सफलता को सुनिश्चित करता है.
आध्यात्मिक शक्ति का सकारात्मक प्रभाव
पुष्कर में आयोजित इस 43 दिवसीय महायज्ञ से उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक तरंगों का प्रभाव न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है. भारी संख्या में श्रद्धालु इस महाकुंभ का साक्षी बनने के लिए पुष्कर पहुँच रहे हैं. स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सामूहिक मंत्रोच्चार से वातावरण में जो ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं, वे मानसिक शांति और पर्यावरण की शुद्धि में सहायक होती हैं. प्रखर जी महाराज के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह अनुष्ठान आने वाले दिनों में पुष्कर को भक्ति और साधना के शिखर पर ले जाएगा. इस महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद होने वाले सकारात्मक परिवर्तनों की प्रतीक्षा अब पूरे धार्मिक समाज को है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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