Holi Special Story : कभी विश्व स्तर पर पहचान रखने वाली आहोर की प्रसिद्ध ‘भाटा गेर’ अब इतिहास बन चुकी है. सात सौ वर्षों पुरानी यह पत्थरमार होली शौर्य और आस्था का अनोखा संगम थी. होली के दूसरे दिन रणभेरी सी गूंज के बीच खेली जाने वाली इस परंपरा को देखने देश-विदेश से लोग आते थे. दो दशक पूर्व एक हादसे के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश से इस पर रोक लग गई.
करीब सात सौ वर्ष पुरानी इस परंपरा की शुरुआत आहोर के वीर अनारसिंह से जोड़ी जाती है. मान्यता है कि वे देवी के परम भक्त थे और उनके आशीर्वाद से उन्होंने युवाओं की वीरता परखने के लिए यह अनूठी परंपरा शुरू की. समय के साथ यह आयोजन आस्था और साहस का प्रतीक बन गया, जिसने आहोर को एक अलग पहचान दी.
कैसे होती थी भाटा गेर
इस परंपरा में दो गुट बनाए जाते थे. उनके बीच कांटों का प्रतीकात्मक दरवाजा खड़ा किया जाता था. इसके बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पत्थर फेंककर शौर्य का प्रदर्शन करते थे. होली के दूसरे दिन रंग खेलने के बाद ढोल-थाली की रणभेरी के बीच शुभ मुहूर्त में यह आयोजन शुरू होता था. पत्थरों की आवाज और जोश से भरे युवाओं की हुंकार के बीच हजारों दर्शक इस दृश्य के साक्षी बनते थे. पूरा माहौल किसी युद्धभूमि जैसा रोमांच पैदा कर देता था.
आस्था, रोमांच और विदेशी आकर्षण
लोक मान्यता थी कि यदि इस गेर में किसी को चोट लगती थी तो देवी की कृपा से वह सात दिन में ठीक हो जाती थी. यही विश्वास लोगों में उत्साह भरता था. इस अनोखी परंपरा को देखने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी पर्यटक पहुंचते थे. कई विदेशी पर्यटकों ने इसे अपने कैमरों में कैद किया और इस पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई. भाटा गेर आहोर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी थी.
हादसे के बाद लगी रोक
करीब दो दशक पहले एक दुखद हादसे में एक युवक की मृत्यु हो गई. इसके बाद राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस पत्थरमार होली पर रोक लगा दी. तब से आहोर की भाटा गेर खामोश है. अब न पत्थरों की वह रणभेरी गूंजती है और न ही हजारों की भीड़ उमड़ती है. हालांकि यह परंपरा अब आयोजित नहीं होती, लेकिन आहोर की यह अनोखी पहचान आज भी इतिहास और लोगों की स्मृतियों में जीवित है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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