आनंद विहार में ट्रैफिक अव्यवस्था पर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित की गई खबर के बाद प्रशासन जग गया है। उसने दिल्ली के प्रमुख प्रवेश द्वार व ट्रांस्पोर्ट हब कहे जाने वाले आनंद विहार पर जाम, अतिक्रमण और यातायात की अराजकता को उजागर करने वाली खबरों ने न केवल जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि न्यायालय और प्रशासन को भी कार्रवाई के लिए मजबूर किया। खबर के बाद ज्यादा ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई और बस संचालन को व्यवस्थित करने पर कार्रवाई शुरू हुई है। जाम का गढ़ बताने वाली खबर सामने आने के बाद यात्रियों व पूर्वी दिल्ली से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
आनंद विहार, दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर स्थित एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब है, जहां आईएसबीटी, रेलवे टर्मिनल, मेट्रो स्टेशन और मुख्य सड़कें एक साथ जुड़ती हैं। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि यहां रोजाना लाखों यात्री बसों, ट्रेनों, मेट्रो और निजी वाहनों से गुजरते हैं, लेकिन प्रशासनिक तालमेल की कमी से जाम की स्थिति स्थायी हो गई है। अवैध बस स्टॉप, अनियंत्रित पार्किंग, ई-रिक्शा और ऑटो की मनमानी, साथ ही फुटपाथों पर रेहड़ी-पटरी वालों का अतिक्रमण यातायात को बाधित करता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आनंद विहार अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के आसपास अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के आदेश दिए, जो सीधे तौर पर इन रिपोर्टों का परिणाम माना जा रहा है।
दैनिक यात्री अंकुर श्रीवास्तव ने प्रशासनिक कार्रवाई के बाद फुटपाथ साफ होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फुटपाथ खाली होने से पैदल यात्रियों को काफी सुविधा हो गई है। बिहार से आए रेवंत मित्रा ने बताया कि व्यापार के सिलसिले में उनका दिल्ली आना अकसर लगा रहता है। पिछली बार जब वह आए थे तो भारी अतिक्रण देखने को मिला था।
ट्रैफिक क्रमियों की संख्या बढ़ी
कौशांबी निवासी स्वप्निल रावत ने बताया कि अमर उजाला कि ग्राउंड रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद आनंद विहार में ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ी हुई नजर आ रही है। पहले जहां एक पुलिस कर्मी तैनात होता था वहां अब एक से अधिक ट्रैफिक पुलिस कर्मी तैनात हैं।
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