व्यापमं घोटाले के आरोपी सुनील कुमार को विशेष न्यायाधीश (व्यापमं प्रकरण) प्रवीण पटेल ने 5 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 4 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी सुनील ने अपनी जगह पर सह आरोपी अर्जुन को पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में भेजा था। सुनील ने
घटना 6 अगस्त 2016 की निशातपुरा थाना क्षेत्र की है। आरपीएफ में रिटायर्ड असिस्टेंट कमांडर ने थाने में शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि वो ट्रूबा कॉलेज करोंद में सेंटर इंचार्ज का काम देख रहे थे। यहां व्यापमं की ओर से आयोजित पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2016 चल रही थी। आगरा उत्तर प्रदेश का रहने वाला सुनील भी परीक्षा देने पहुंचा था। उसने अपना रजिस्ट्रेशन खुद करवाया।
इसके बाद उसे लैब नंबर 3 में सीट नंबर 116 दी गई। इसके बाद आरोपी सुनील बहाना करके गेट के बाहर चला गया और अपनी जगह अर्जुन को परीक्षा देने अंदर भेजा। जब अर्जुन अंदर जाने लगा तो गार्ड ने उसे रोक लिया। एडमिट कार्ड और आधार कार्ड की फोटो अलग अलग होने से अर्जुन को परीक्षा केंद्र के अधीक्षक के पास लेकर जाया गया। यहां उसने फर्जी तरीके से परीक्षा में शामिल होना कबूल किया।
सुनील ने अपने आधार पर अर्जुन का फोटो स्कैन करके दिया था अर्जुन ने पूछताछ में बताया था कि सुनील ने परीक्षा केंद्र में जाकर अपना एडमिट कार्ड चेक कराकर रजिस्ट्रेशन कराया। बाद में बाहर आया और उसे अपनी जगह परीक्षा देने एडमिट कार्ड देकर अंदर भेजा। सुनील ने अपने आधार कार्ड पर उसकी फोटो स्कैन कर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर पहचान के लिए दिया था।
2013 में हुआ था का खुलासा, कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं
व्यापमं घोटाला 2009 में शुरू हुआ था। इसका खुलासा बड़े स्तर पर साल 2013 में हुआ था। जांच में सबसे पहले पुलिस और मेडिकल परीक्षाओं में गड़बड़ी पाई गई थी। जांच में सामने आया था कि इन परीक्षाओं में पैसे लेकर नकल कराई जाती थी।
ओएमआर शीट बदलना, रोल नंबर और सीट बदलना, फर्जी आधार और एडमिट कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे पहले जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। बाद में इसे सीबीआई को सौंपा गया। व्यापमं के कई मामले अभी कोर्ट में चल रहे हैं।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.