वहीं पूरे मामले को लेकर सिहावल एसडीएम एवं पुरातत्व विभाग की प्रभारी अधिकारी प्रिया पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें इस संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी। यह विषय पुरातत्व विभाग से संबंधित है, इसलिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया है, लेकिन फिलहाल अभी तक कोई भी विशेषज्ञ टीम मौके पर नहीं पहुंच सकी है। साथ ही वन विभाग को भी सूचना दी गई है ताकि स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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इन्होंने देखी सबसे पहले
स्थानीय निवासी नारायण केवट निवासी अतरौला ने बताया कि पहाड़ी पर जब उन्हें बड़ी हड्डियां दिखाई दीं है तो उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी सरपंच को दी, लेकिन इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी दौरान गांव के कुछ बच्चों द्वारा हड्डियों को इधर-उधर फेंका जाने लगा, जिससे संभावित ऐतिहासिक साक्ष्यों को नुकसान पहुंचने का अब बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति को देखते हुए नारायण केवट ने स्वयं पहल करते हुए बिखरी हड्डियों को एकत्र कर एक स्थान पर सुरक्षित रखा, ताकि विभागीय टीम आकर जांच कर सकें।
पांच दिन बाद भी कोई नहीं पहुंचा
राम सुमिरन पटेल ने इस मामले मे नाराजगी जताते हुए कहा कि इस घटना को करीब पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। हड्डियां पहाड़ी क्षेत्र में चारों ओर बिखरी पड़ी हैं, जिससे इनके नष्ट होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
गांव की पहाड़ी में मिला हजारों साल पहले का जीवाश्म

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