उनको वन विभाग द्वारा बताया गया कि यह क्षेत्र पंजाब के एरिया से आने वाले सीवेज से प्रभावित था और इसको इको रेस्टोरेशन के माध्यम से हरित क्षेत्र में बदला गया है। इसमें सीवेज का डायवर्जन किया गया और बंडिंग साइट्स के विकास से क्षेत्र का विकास किया गया।
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