गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में दो दिवसीय अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ का आयोजन हो रहा है। इस कार्यक्रम में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए ह
यह आयोजन पंखराज साहेब कार्तिक उरांव चौक बैरियर बगीचा, मांझाटोली में हो रहा है। इसमें विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी पारंपरिक खोड़हादल नृत्य मंडलियां अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगी।
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रहेंगे मौजूद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को गुमला जिले के रायडीह प्रखंड पहुंचेंगी। उनके साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव और एसटी-एससी विषयक संसदीय समिति के अध्यक्ष फगन सिंह कुलस्ते भी मौजूद रहेंगे।
राष्ट्रपति के दौरे और महोत्सव को देखते हुए जिला व प्रखंड प्रशासन लगातार आयोजन स्थल की तैयारियों में जुटा हुआ है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल पर पुलिस जवानों की तैनाती कर दी गई है। आदिवासी शक्ति स्वायत्त शासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियों को लेकर नियमित रूप से बैठकें कर रही है।

कार्यक्रम स्थल पर पुलिस जवानों की तैनाती कर दी गई है।
सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक नो फ्लाई जोन घोषित
राष्ट्रपति के आगमन और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर, गुमला जिला हवाई क्षेत्र में 30 दिसंबर को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक “नो फ्लाई जोन” घोषित किया गया है। इस अवधि के दौरान ड्रोन, पैराग्लाइडर या अन्य हवाई उपकरणों का संचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। नियम के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गुमला में कार्यक्रम की समाप्ति के बाद, राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से रांची लौटेंगी और फिर दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को गुमला जिले के रायडीह प्रखंड पहुंचेंगी।
कार्तिक उरांव का इस क्षेत्र में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय था सपना
इधर, पंखराज साहेब कार्तिक उरांव आदिवासी शक्ति स्वायत्तशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति के संयोजक व अध्यक्ष प्रदेश भाजपा के एसटी मोर्चा अध्यक्ष शिवशंकर उरांव ने कहा कि इस जतरा का उद्देश्य झारखंड-छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सांस्कृतिक पुनरुद्धार, सुदृढ़ीकरण और शैक्षिक उत्थान को बढ़ावा देना है। कार्तिक उरांव का सपना था कि इस क्षेत्र में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बने। उन्होंने इसका नाम शांति निकेतन रखने का प्रस्ताव रखा था।
उन्होंने 1981 में केंद्र सरकार के सामने यह मांग उठाई थी। उन्होंने इसे तीनों राज्यों की सीमा पर खोलने का प्रस्ताव रखा था। वे चाहते थे कि यहां ऐसा विश्वविद्यालय बने, जिसमें आदिवासी बच्चे पहली से पीजी तक की पढ़ाई कर सके। उन्हें रोजगारपरक शिक्षा मिले और आदिवासी संस्कृति की रक्षा हो।
कौन थे कार्तिक उरांव
कार्तिक उरांव झारखंड के एक प्रमुख आदिवासी नेता और शिक्षाविद थे। लंदन से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले वे पहले आदिवासी भारतीय थे। उन्होंने संसद में प्राइवेट बिल लाया था, जिसमें धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ न मिलने की वकालत की थी।
आदिवासी अधिकारों, उनकी जमीन और पहचान बचाने के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद (1968) की स्थापना की, जो शिक्षा और रोजगार पर केंद्रित थी। लोहरदगा लोकसभा सीट से वे तीन बार (1967, 1971, 1980) सांसद चुने गए।