पशुधन विकास विभाग के अतिरिक्त उप संचालक डॉ. बी. आर. खंडे ने पशुपालकों को आहार प्रबंधन को लेकर अहम जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि पशु आहार में ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल का संतुलन बेहद जरूरी होता है. अगर आहार संतुलित नहीं होगा, तो उसका सीधा असर दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत पर पड़ेगा.
ऊर्जा और प्रोटीन से बनता है मजबूत पशु
डॉ. खंडे के अनुसार, पशुओं को ऊर्जा देने के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा और गेहूं जैसे अनाज बेहद उपयोगी होते हैं. ये अनाज पशुओं को जरूरी ताकत देते हैं और उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं. वहीं प्रोटीन की पूर्ति के लिए चना, अरहर और सोयाबीन जैसी दालों को पशु आहार में शामिल करना चाहिए. इससे पशुओं की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और दूध उत्पादन में भी साफ बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
आज बाजार में कई कंपनियों के रेडीमेड पशु आहार उपलब्ध हैं, जिन्हें पशुपालक जरूरत के हिसाब से खरीद सकते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि घर पर तैयार किया गया आहार ज्यादा किफायती, भरोसेमंद और सुरक्षित होता है.
हरे चारे के बिना अधूरी है डेयरी
पशुओं के आहार में हरे चारे की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. जो किसान डेयरी के रूप में पशुपालन कर रहे हैं, उन्हें अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में हरा चारा जरूर उगाना चाहिए. हरे चारे में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं.
मिनरल मिक्सचर और नमक भी जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक पशु आहार में मिनरल मिक्सचर और नमक का शामिल होना भी बेहद जरूरी है. मिनरल मिक्सचर से कैल्शियम, फास्फोरस और अन्य जरूरी खनिज मिलते हैं, जिससे पशुओं की हड्डियां मजबूत होती हैं और दूध उत्पादन में सुधार आता है.
ठंड में पशुओं की खास देखभाल करें
ठंड के मौसम में पशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है. सुरक्षित आवास, साफ-सफाई और संतुलित आहार से पशु बीमारियों से बचे रहते हैं. इसका सीधा फायदा पशुपालकों को बेहतर दूध उत्पादन और अच्छी आमदनी के रूप में मिलता है. इसलिए जरूरी है कि सर्दी के मौसम में पशुपालक समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें.