कटड़ा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की ओर से फिर से मान्यता लेने व केंद्रीय पूल से आवंटन प्राप्त करने की कोशिश शुरू हाे गई है। इस बीच श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने दो दिन बाद इस सबंध में चर्चा के लिए बैठक बुलाई है।
संस्थान में मुस्लिम छात्रों के प्रवेश के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। इससे जनवरी में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने मान्यता रद्द कर दी थी। पूरे मामले में श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले हिंदूवादी संगठनों ने 50 एमबीबीएस सीटों में हिंदू छात्रों की उपेक्षा का आरोप लगाकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किए थे।
अभी ठंड हुआ था कि दो दिन पहले डीएन की तरफ से मेडिकल इंस्टीट्यूट दोबारा शुरू करने के लिए एनएमसी के सामने आवेदन कर दिया गया है। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति का आरोप है कि इसकी जानकारी समिति के पदाधिकारियों को नहीं दी गई।
पहले मेडिकल इंस्टीट्यूट का संचालन श्राइन बोर्ड की तरफ से किया जा रहा था। इसमें इस वर्ष एमबीबीएस की सीटों की संख्या 50 रखी गई थी। जिसमें 42 सीटों पर गैर सनातनी छात्रों का प्रवेश लिया गया था। इसे लेकर हिंदूवादी संगठनों को साथ लेकर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने आंदोलन किया।
पूरे देश में विरोध के बाद एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी गई जिसमें कहा गया कि मानकों को मेडिकल कॉलेज पूरा नहीं कर पा रहा था। एक बार फिर कटड़ा मेडिकल कॉलेज सुर्खियों में आ गया है जहां प्रबंधन ने डीन के माध्यम से एनएमसी के सामने एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने के लिए नए सिरे से आवेदन किया गया है।
मेडिकल इंस्टीट्यूट के डीएन की ओर से आवेदन की जानकारी पूरे मामले में सड़क तक आंदोलन करने वाली संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को भी नहीं दी गई। इससे पदाधिकारियों में रोष है। अब देखना यह है कि मेडिकल कॉलेज को किस वर्गीकरण में रखा जाएगा और यह केंद्रीय पूल में होगा या प्रदेश सरकार के अधीन संचालित होगा।