लुधियाना| 87 वर्ष की आयु में प्रख्यात कीर्तनकार मोहिंदर सिंह परभाकर को भोपाल स्थित एसएएम ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा पीएचडी की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस सम्मान का समन्वय सिख स्टडी सर्कल के माध्यम से किया गया। जीवन के इस पड़ाव पर मिली यह उपलब्धि न केवल उनके समर्पण और साधना का सम्मान है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सीखने और सेवा की कोई आयु सीमा नहीं होती। पटना साहिब में जन्मे मोहिंदर सिंह परभाकर बचपन से ही आध्यात्मिक वातावरण में पले-बढ़े। गुरबाणी और कीर्तन से उनका जुड़ाव बहुत कम उम्र से ही हो गया था। वर्षों से वे गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश लोगों तक पहुंचा रहे हैं। मोहिंदर सिंह परभाकर केवल एक प्रसिद्ध कीर्तनकार ही नहीं, बल्कि एक विद्वान व्यक्तित्व भी हैं। उन्होंने अंग्रेजी, पंजाबी और संगीत विषयों में डबल एमए की उपाधि प्राप्त की है। उनकी यह पुस्तक पाठकों को गुरमत विचारधारा को समझने और उसे जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है। 87 वर्ष की आयु में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।
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