आगरा के राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट के 25 से ज्यादा दुकानदारों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम अरविंद एम बंगारी से संरक्षण की गुहार लगाई और ज्ञापन सौंपा। दुकानदारों ने कहा कि बाजार के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। मार्केट में किसी प्रकार की अवैध विध्वंसात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा संरक्षण प्रदान किए जाने की मांग की।
दुकानदार अभिषेक जैन ने बताया कि लाभचंद मार्केट वर्ष 1940 एवं 1947 में शासन की ओर से दिए गए दो पट्टों में मिली जमीन पर बना है। 75 वर्षों में प्राधिकरण ने इन पट्टों को न अवैध घोषित किया और न ही बाजार को कभी अतिक्रमण माना। फुटपाथ पर स्थित खंभे 1950 के दशक में स्वीकृत बरामदा के लिए निर्मित थे। दुकानों का आवंटन भी उसी दशक में कानूनी रूप से किया गया था। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि कुछ किरायेदार अब भी 50 से 100 रुपये प्रतिमाह के किराये पर दुकानें चला रहे हैं। सरकारी किराया 112.50 रुपये है, लेकिन 1,25,000 रुपये पर दुकान दे रखी है।
दुकानदार बोले- सड़क पर नहीं निर्माण
दुकानदारों ने डीएम से कहा कि पट्टे की भूमि को गाटा संख्या 287 (सड़क भूमि) बताया जा रहा है, जबकि 10 फरवरी के सीमांकन में सामने आया कि एमजी रोड से कन्हैया बिल्डिंग के पश्चिमी छोर तक राजामंडी रोड का क्षेत्रफल ही 1270 वर्गमीटर से अधिक है, जो गाटा संख्या 287 के कुल क्षेत्रफल से ज्यादा है। सड़क पर निर्माण नहीं किया गया है। जो शिकायतें की गईं, उनमें मृतकों के हस्ताक्षर भी पाए गए। इनकी जांच कर प्राथमिकी दर्ज की जाए। इस दौरान पुष्पेंद्र तोमर, अनूप गुप्ता, वीरेंद्र शर्मा, वासुदेव, सुधीर नाहर, सनी राजपूत, आरसी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
संयुक्त जांच रिपोर्ट का इंतजार
10 फरवरी को प्रशासन ने संयुक्त जांच टीम से राजामंडी स्थित लाभचंद मार्केट की पैमाइश कराई थी। ड्रमंड रोड चौराहे के नाम से मौजूद चौराहे पर एक ओर लाभचंद मार्केट बना है तो दूसरी ओर नूरी दरवाजा जाने वाली सड़क ज्यादा चौड़ी है। पैमाइश की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जानी है। डीएम अरविंद एम बंगारी ने बताया कि कार्रवाई से पहले सभी बिंदुओं की पुख्ता जांच जरूरी है। दो दिनों के अंदर स्थिति साफ हो जाएगी। मेरे पास अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
डीएम के शपथपत्र में ये हैं तथ्य
– आगरा नगर निगम ने शर्तों के उल्लंघन पर बीते साल 5 अप्रैल को ही पट्टा रद्द कर दिया था।
– होटल धर्मलोक और चंद्रलोक का निर्माण पट्टे की जमीन और गाटा संख्या 287 की सड़क की जमीन पर किया गया
– राजस्व रिकॉर्ड में यह जगह पक्की सड़क और कलेक्टर के खेवट नंबर 1-बी के प्रबंधन में दर्ज है।
– ऑफिस और निवास की अनुमति के उलट होटल संचालित किया गया, पार्क की जगह दुकानें बना दीं गईं।
– नगर आयुक्त ने वर्ष 2009 में रिपोर्ट दी थी कि 1947 का मूल पट्टा और नवीनीकरण तथ्य छिपाकर लिया गया।
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