पंजाब सरकार ने जेलों में बंद कैदियों और बंदियों की मानसिक सेहत सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सूबे की 25 जेलों में 60 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही जेल परिसरों में तंदरुस्ती क्लीनिक खोले जाएंगे। गुरदासपुर और होशियारपुर जेलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जबकि आठ जेलों में यह केंद्र पहले से संचालित हैं। यह फैसला राज्य सरकार की मेंटल हेल्थ पॉलिसी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जेलों में अवसाद, तनाव और नशे की लत से जूझ रहे कैदियों को मानसिक संबल और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाना है।
अवसाद से जूझ रहे कैदियों को मिलेगी राहत
पंजाब में 10 सेंट्रल जेल, 9 जिला जेल, 5 सब-जेल और 2 महिला जेल हैं। इनमें कट्टर अपराधियों के साथ-साथ किशोर, युवा और नशा तस्करी के मामलों में फंसे बड़ी संख्या में बंदी मौजूद हैं। जेल अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से बंद कैदी, पहली बार जेल आने वाले बंदी और नशे के आदी कैदी गंभीर अवसाद में चले जाते हैं। ऐसे में नियमित मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की बेहद जरूरत महसूस की जा रही थी। मनोवैज्ञानिकों की तैनाती से कैदियों और बंदियों की नियमित काउंसलिंग संभव होगी, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकेंगे।
नशा मुक्ति केंद्रों का होगा विस्तार
फिलहाल राज्य की आठ केंद्रीय जेलों में नशा मुक्ति केंद्र काम कर रहे हैं। अब गुरदासपुर और होशियारपुर जेलों में भी यह सुविधा शुरू की जाएगी। इसके साथ तंदरुस्ती क्लीनिकों के जरिये कैदियों की शारीरिक और मानसिक जांच तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाएगी। सरकार के अनुसार, सभी 25 जेलों के लिए 60 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इनके कार्यभार संभालने के बाद जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी।
रिकवरी एम्बेसडर होंगे तैयार
सूरमा कार्यक्रम के तहत नशा छोड़ चुके लोगों को रिकवरी एम्बेसडर के रूप में मान्यता दी जा रही है। 700 कॉल के जरिए 25 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें जिला स्तर पर तैनात किया जाएगा। ये एम्बेसडर नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में अहम भूमिका निभाएंगे।
नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़े मरीज
सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2025 में 962 मरीजों की संख्या बढ़कर 2,674 हुई, जो अब 2,756 तक पहुंच गई है। सरकारी पुनर्वास केंद्रों में मरीज 275 से बढ़कर 804 हो गए हैं। वहीं ओओएटी सरकारी क्लीनिकों में 27.64 लाख मरीज पंजीकृत हो चुके हैं।
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