भास्कर न्यूज | जालंधर जिले के लोगों की सेहत के साथ हो रहे खिलवाड़ का एक बड़ा खुलासा स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट में हुआ है। जनवरी और फरवरी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए पानी के नमूनों में से 8 सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए हैं। इनमें सबसे चिंताजनक बात यह है कि फेल हुए सैंपलों में सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक के सैंपल फेल आए हैं। हालांकि गर्मी बढ़ने पर पानी के सैंपल लेने का काम तेज होगा। वैसे भी जून और जुलाई में सबसे ज्यादा पानी के सैंपल लेने का काम होता है। जिले में सेहत विभाग ने जनवरी में कुल 23 नमूने एकत्र किए थे, जिनमें से 6 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे और फेल आए है। वहीं फरवरी में 20 नमूने लिए, जिनमें से 2 सैंपल फेल आए। वहीं मार्च में 10 सैंपल में एक सैंपल फेल आया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिन स्थानों के सैंपल फेल हुए हैं, उनमें भोगपुर, नवी आबादी और सार्वजनिक इलाके शामिल हैं। इसके अलावा, बच्चों की सेहत से जुड़े संवेदनशील स्थानों जैसे सरकारी स्कूल और सार्वजनिक स्थल के नमूने भी असुरक्षित पाए गए हैं। स्कूलों में पानी के सैंपल फेल होना शिक्षा विभाग और जल आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इस दौरान सैंपल फेल आने की पुष्टि होते ही सेहत विभाग ने संज्ञान लिया है। वहीं विभाग द्वारा संबंधित विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही दूषित पानी के कारणों की पहचान कर उसे तुरंत दुरुस्त किया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी करने के साथ ही मौके पर सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। क्लोरीनेशन की प्रक्रिया को तेज कर दूषित पानी की समस्या को खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। साल 2025 में 50% से ज्यादा नमूने फेल जिले में सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संस्थानों में मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता पर एक चिंताजनक खुलासा हुआ है। साल 2025 में सेहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुल 760 नमूनों में से 397 नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। इन फेल नमूनों में एक बड़ी संख्या सार्वजनिक स्थलों और स्कूलों की है। जांच रिपोर्ट में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और अशुद्धियां पाई गई हैं, जो बच्चों और आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी से पीलिया, टाइफाइड और पेट संबंधी गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। गंदे पानी के कारण फैल सकती हैं ये बीमारियां {सबसे ज्यादा सैंपल कोलीफॉर्म और ई-कोली बैक्टीरिया के कारण फेल होते हैं। यह संकेत देता है कि पानी में सीवरेज या गंदगी का मिश्रण है, जिससे दस्त, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। {टीडीएस पानी में घुले हुए सभी खनिजों (कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम आदि) का कुल योग है। यदि टीडीएस 500 mg/l से अधिक है, तो पानी का स्वाद खराब हो जाता है और लंबे समय तक इसके सेवन से किडनी की पथरी की समस्या हो सकती है। {यदि पानी में फ्लोराइड 1.5 mg/l से अधिक हो, तो यह दांतों और हड्डियों के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फ्लोरोसिस नाम की बीमारी हो सकती है जिससे हड्डियां कमजोर और टेढ़ी हो जाती हैं।
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