वर्तमान में जहां प्रदेश के खिलाड़ी विश्व स्तर पर कीर्तिमान रच रहे हैं, वहीं खिलाड़ियों की हड्डियां कमजोर हैं। स्वास्थ्य विज्ञान विवि के स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग की ओर से खिलाड़ियों पर की गई रिसर्च में सामने आया है कि प्रदेश के 44 प्रतिशत खिलाड़ी विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें 89 प्रतिशत खिलाड़ी रोजाना अभ्यास करने वाले हैं। केवल 18 प्रतिशत खिलाड़ी एक व 13 प्रतिशत खिलाड़ी दो घंटे विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए धूप सेंकते हैं।
84 प्रतिशत खिलाड़ियों ने नहीं करवाया विटामिन डी का टेस्ट
स्पोर्ट्स मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश रोहिला ने बताया कि रिसर्च को लेकर टीम ने पानीपत, झज्जर, रोहतक, हिसार व अन्य जिलों के खेल परिसरों में जाकर खिलाड़ियों में विटामिन डी की जांच व कुछ सवाल किए। इस रिसर्च में 400 खिलाड़ियों की जांच की गई। रिसर्च के अनुसार इनमें 75 प्रतिशत खिलाड़ी 16 से 21 वर्ष के हैं। इनमें से 84 प्रतिशत खिलाड़ियों ने विटामिन डी का टेस्ट ही नहीं कराया था।
रिसर्च में बाक्सिंग के 30, हॉकी के 22, कुश्ती के 19, एथलेटिक्स के 12 प्रतिशत खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। इस टीम में बायोकेमेस्ट्री विभाग से डॉ. मंजु कुमावत, स्पोर्ट्स साइकोलोजिस्ट डॉ. मनदीप व स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. दिव्या शामिल रहे।
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