अपने सीने पर देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा लेकर घूमने वाले इंदौर के नलों में ‘जहर’ बह रहा है। भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से अब तक 12 लोगों की मौत हो गई। बुधवार को 4 और मौतों का खुलासा हुआ। इनमें 5 माह का एक मासूम बच्चा और तीन बुजुर्ग शामिल हैं। स
जिस मासूम अव्यान की जान गई, उसे कोई बीमारी नहीं थी। परिजनों के अनुसार, उसे बाहरी दूध दिया जा रहा था। मां साधना ने इसी दूध में थोड़ा सा नगर निगम से सप्लाई होने वाला पानी मिलाया था। इसे पीकर अव्यान की तबीयत ऐसी बिगड़ी कि सोमवार को अस्पताल ले जाते समय बच्चे ने दम तोड़ दिया।
इसी तरह, पानी की टंकी के पास रहने वाले जीवनलाल बरेडे (80) की 28 दिसंबर को मौत हो गई। परिजन का कहना है कि दूषित पानी पीने से उनकी तबीयत बिगड़ी थी। भागीरथपुरा निवासी अशोकलाल पंवार पहले से बीपी सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। कुछ दिन पहले उल्टी-दस्त शुरू हुए। हालत बिगड़ने पर उन्हें एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, पर 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। ईमली गली में रहने वाले शंकर भाया (70) की भी जान चली गई।
मीडिया पर भड़के मंत्री कैलाश: अपने विधानसभा क्षेत्र में दूषित पानी से मौतों पर सवाल पूछने पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भड़क गए। पत्रकार को फालतू सवाल न पूछने को कहा, अपशब्द भी कहे।
स्वच्छ शहर के ये हाल… 7 साल से नर्मदा की जगह खरीदकर पी रहे पानी वार्ड 57 के जेल रोड इलाके में भी हालात चिंताजनक हैं। 15 मिनट गंदा पानी आता है, फिर कुछ देर साफ और फिर दोबारा गंदा। सोनार गली के लोग पिछले 7 साल से कैंफर (आरओ जार) का पानी मंगवा रहे हैं। निवासी दाऊलाल व्यास बताते हैं, “कैंफर का पानी पीकर भी मेहमान बीमार हो चुके हैं। अब मेहमान आते हैं तो बोतलबंद पानी मंगवाते हैं। नर्मदा का साफ पानी आज तक नसीब नहीं हुआ।’
10 साल की मन्नतों के बाद हुआ था… 5 माह का था, मां ने दूध में थोड़ा सा पानी मिलाया था
अव्यान के पिता सुनील साहू ने बताया कि बेटे का जन्म 8 जुलाई को हुआ था। दो दिन पहले बच्चे को बुखार और दस्त शुरू हुए। सुभाष नगर में बच्चों के डॉक्टर को दिखाया। दवाइयां दी गईं, पर फायदा नहीं हुआ। सोमवार रात तेज बुखार और लगातार दस्त शुरू हो गए। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। सुनील कहते हैं- ‘10 साल की मन्नतों के बाद बेटा हुआ था।’ मां साधना बार-बार बेसुध हो रही हैं।
40 हजार की जांच, 162 भर्ती, 26 आईसीयू में, सीएम बोले- जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी
- स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों में अब तक 212 मरीज भर्ती हो चुके हैं। 50 डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। 162 का इलाज जारी है, 26 आईसीयू में हैं।
- प्रभावित क्षेत्र में 7,992 घरों का सर्वे किया गया है। 39,854 लोगों की जांच हुई।
- सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, जांच में दोषी जिम्मेदार अफसरों पर होगी कार्रवाई।
हाई कोर्ट ने कहा– सभी मरीजों का मुफ्त इलाज हो गंदे पानी से मौतों के मामले में हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाओं में नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जितने भी मरीज भर्ती हों, उनका उच्च स्तरीय और मुफ्त इलाज किया जाए। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।
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