औद्योगिक नगरी बहादुरगढ़ के करीब 2500 करोड़ रुपये के पैकेजिंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने जीएसटी दरों में राहत की मांग उठाई है। पैकेजिंग के कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जबकि तैयार माल पर 5 प्रतिशत जीएसटी की दर है। ऐसे में उद्यमियों को आर्थिक नुकसान के साथ रिफंड कराने में पसीने छूट रहे हैं।
रिटर्न भरने के 3-4 महीनों बाद भी रिटर्न मुश्किल से मिल पाता है। उद्यमियों ने जीएसटी की दर समान करने और रिफंड समय पर करने की मांग की है। प्रदेश बजट मार्च में पेश किया जाएगा। उद्यमियों ने कहा कि पैकेजिंग उद्योग के लिए भी कोई विशेष राहत पैकेज दिया जाए ताकि उद्योग आसानी से फल-फूल सके।
बहादुरगढ़ में फुटवियर उद्योग के अलावा पैकेजिंग क्षेत्र से जुड़ी लगभग 500 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं जिनका सालाना टर्नओवर करीब 2 से 10 करोड़ रुपये तक है। सभी इकाइयों का सालाना टर्न ओवर करीब 2500 करोड़ रुपये का है।
उद्यमियों के अनुसार पैकेजिंग के कच्चे माल से तैयार उत्पाद पर जीएसटी दर में 13 प्रतिशत की असमानता है। इस कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट अटक जाता है और पूंजी फंस जाती है। या तो सेल और परचेज पर जीएसटी की दर एक समान हो या रिफंड की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए।
ये बोले उद्यमी…
जीएसटी रिफंड में काफी परेशानियां आती हैं और महीनों तक भुगतान लंबित रहता है। इससे कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ता है। यदि समय पर रिफंड मिल जाए तो उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं रिफंड कराने में अधिकारियों को सुविधा शुल्क भी देना पड़ता है सो अलग।
-सुरेंद्र वशिष्ठ, शिवा इंटरप्राइजिज, एमआईई, बहादुरगढ़।
पैकेजिंग से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां छोटी हैं। अधिकांश इकाइयां 2-10 करोड़ के सालाना टर्नओवर की हैं। कच्चा माल नकद पर खरीद करना पड़ता है। इसका जीएसटी भी खरीद पर अदा कर देते हैं लेकिन तैयार माल की पेमेंट 3-6 माह में होती है। ऐसे में इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने में भी इतना ही समय लग जाता है। रिफंड अगर समय पर हो जाए या फिर टैक्स दर समान हो जाए तो आर्थिक नुकसान कम होगा।
-विकास गुप्ता, विशिष्ठ पैकेजिंग, गणपति धाम, बहादुरगढ़।
तैयार माल व कच्चा माल में जीएसटी दर समान न होने से पैकेजिंग उद्योग इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस असमानता के कारण उद्यमी काफी परेशान हैं। बहादुरगढ़ में फुटवियर और पानीपत में टैक्सटाइल उद्योगों जैसे बड़े-बड़े कलस्टर बेस उद्योगों की मांग तो समय पर उठ जाती है और उनका समाधान भी हो जाता है। पैकेजिंग उद्योग हर औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित हैं लेकिन इस उद्योग की मांग उठाने वाला कोई विशेष संगठन नहीं है। इस कारण उनकी मांग अब तक अधूरी है। ऐसे में हमारी सरकार से मांग है कि जीएसटी में राहत दी जाए या फिर रिफंड समय पर किया जाए।
-नीरज गोयल, गोयल पैकर, बहादुरगढ़।
फोटो-56:सुरेंद्र वशिष्ठ
फोटो-57: नीरज गोयल।
फोटो-58: बहादुरगढ़ की एक फैक्टरी में बनाया जा रहा पैकेजिंग का सामान। संवाद
फोटो-63: विकास गुप्ता
फोटो-56:सुरेंद्र वशिष्ठ– फोटो : samvad

फोटो-56:सुरेंद्र वशिष्ठ– फोटो : samvad

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