तंबाकू के विभिन्न उत्पादों के सेवन से कैंसर जैसे लाइलाज रोग होने की आशंका रहती है। बावजूद इसके प्रदेश में आबादी का बड़ा हिस्सा किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहा है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। उसमें बताया है कि राज्य में 24.7 प्रतिशत वयस्क लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। तंबाकू सेवन की दर में कमी लाने के लिए वर्ष 2025 से दो महीने का तंबाकू मुक्त युवा अभियान भी आयोजित किया गया था। वित्तीय वर्ष 2025–2026 में इसके लिए 931.40 लाख रुपए का बजट तय किया गया था। उसमें से 223 लाख रुपए का बजट खर्च किया जा सका। इस वर्ष सरकार ने व्यापक जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और सख्त कानून प्रवर्तन के माध्यम से इस दर को कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। युवाओं को केंद्र में रखते हुए चलाए गए विशेष 60 दिवसीय तंबाकू मुक्त युवा अभियान में शिक्षण संस्थानों को तंबाकू के प्रभाव से मुक्त करने और नई पीढ़ी को इस जानलेवा शौक से दूर रखने की कई गतिविधियां आयोजित की गईं। जन-जागरूकता रैलियां, तंबाकू मुक्त विद्यालय निर्माण, कोटपा अधिनियम के तहत चालान की कार्यवाही और क्षमता वर्धन कार्यक्रम कराए गए। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 98 हजार से ज्यादा शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान दिशा-निर्देशों के आधार पर किया गया। इनमें से 83 हजार से ज्यादा संस्थानों के परिसरों को तंबाकू मुक्त घोषित कर दिया गया है। विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, स्लोगन लेखन, पोस्टर मेकिंग जैसी 85 हजार से ज्यादा प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया गया था। इसके साथ ही 84 हजार सत्रों के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को तंबाकू मुक्त रहने की सामूहिक शपथ दिलाई। शिक्षण संस्थानों के भीतर और बाहर तंबाकू के दुष्प्रभावों को बताने के लिए लगभग 86 हजारा स्कूल रैलियां निकाली गईं। कोटपा एक्ट की कार्रवाई भी की।
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