हिलसा व्यवहार न्यायालय के एडीजे 4 ने सुनाई सजा
नालंदा जिले के चंडी थाना क्षेत्र में हुए शंकर हत्याकांड में छह साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। हिलसा व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-04) ने सोमवार को सुनवाई करते हुए कुल 18 आरोपियों को दोषी करार दिया। इसमें मुख्य 5 दोषियों को
नालंदा पुलिस की ओर से समय पर गवाहों को उपस्थित कराने और ठोस साक्ष्य (Evidence) प्रस्तुत करने के आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। चंडी थाना कांड संख्या 382/20 के तहत चल रहे इस मामले में कोर्ट ने भादवि की धारा 302 (हत्या), 147, 148, 448 और आर्म्स एक्ट के तहत दोषियों को सजा सुनाई है।
चांदी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है मामला।
उम्रकैद और जुर्माना
कोर्ट ने गोपी बिगहा (चमरोली) निवासी सत्येन्द्र दास, राजकुमार दास, शिवचंद्र दास, पप्पू दास और जगदीश दास को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही इन पर 20-20 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में इन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा ।
13 लोगों को एक साल की कैद
इसी मामले में भीड़ का हिस्सा बनने और मारपीट करने के दोषी पाए गए 13 अन्य लोगों को एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। इनमें मुकेश दास, इंद्रजीत दास, संजय दास, सोनी दास, रामप्रवेश दास, किशोर दास, जय किशुन दास, सुमंगल दास, बिनोद दास और बबीता देवी, गुड़िया देवी, उर्मिला देवी, मुनर देवी शामिल हैं। ये सभी गोपी बिगहा गांव के ही रहने वाले हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला
चंडी थाना क्षेत्र के रसलपुर गांव के रहने वाले भूषण रजक ने 35 नामजद लोगों के खिलाफ 27 अगस्त को भतीजे शंकर कुमार की हत्या का केस दर्ज कराया था। आरोप था कि 35 लोगों ने उसके घर को घेर लिया। लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। जब भूषण रजक को बचाने उसका भतीजा आया तब शंकर कुमार को कुछ लोग पकड़ के छत पर ले गए और उसके जबड़े में गोलीमार दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। घटना का विवाद जमीन और रास्ता का था।।
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